Solar System: हम हमेशा से जानते हैं कि बृहस्पति सबसे बड़ा ग्रह है और इसके अंदर 1200 पृथ्वी समा सकती हैं। लेकिन NASA के जूनो स्पेसक्राफ्ट ने बताया है कि यह हमारे पिछले अनुमानों से थोड़ा छोटा है। नई रिसर्च से पता चला है कि यह पूरी तरह से गोल नहीं है, बल्कि चपटा है। यह अपने ध्रुवों पर थोड़ा दबा हुआ है और सूर्य से पांचवां ग्रह है। यह पूरी तरह से हाइड्रोजन और हीलियम गैसों से बना है, वही गैसें जिनसे सूर्य और दूसरे तारे बने हैं।
अब अनुमान है कि बृहस्पति का व्यास पहले के अनुमान से लगभग 8 किलोमीटर छोटा है। उत्तर से दक्षिण की दूरी भी पहले के अनुमानों से 24 किलोमीटर कम पाई गई है। यह अपनी भूमध्य रेखा पर 7% चौड़ा है, जबकि पृथ्वी अपनी भूमध्य रेखा पर सिर्फ 0.33% चौड़ी है।
आकार क्यों मायने रखता है?
यह हमें यह समझने में मदद करेगा कि ग्रह के अंदर क्या हो रहा है और यह किन परतों से बना है। यह यह भी बताएगा कि इसका वायुमंडल, मौसम और चुंबकीय क्षेत्र कैसे काम करते हैं। बृहस्पति के कई चंद्रमा हैं, जैसे आयो और यूरोपा, और नया आकार हमें यह समझने में मदद करेगा कि बृहस्पति का गुरुत्वाकर्षण खिंचाव उन्हें कैसे प्रभावित करता है।क्योंकि यह सबसे बड़ा ग्रह है, इसलिए इसने दूसरे ग्रहों के बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वैज्ञानिकों का मानना है कि अरबों साल पहले, बृहस्पति पृथ्वी पर पानी और जीवन के लिए ज़रूरी दूसरे तत्वों को लाने के लिए ज़िम्मेदार था। इसका गुरुत्वाकर्षण इतना मज़बूत है कि यह या तो पृथ्वी की ओर आने वाले खतरनाक उल्कापिंडों को अपनी ओर खींच लेता है या उनके रास्ते बदल देता है।