Science: वैज्ञानिकों ने रोमानिया के ट्रांसिल्वेनिया इलाके में एक जीवाश्म स्थल खोजा है। इस जगह ने डायनासोर के बारे में लंबे समय से चली आ रही मान्यताओं को चुनौती दी है। हाटेग बेसिन में स्थित इस जगह पर बहुत छोटे से इलाके में सैकड़ों जीवों के अवशेष मिले हैं। ये जीवाश्म लगभग 72 मिलियन साल पुराने हैं। खास बात यह है कि यहां पाए गए डायनासोर आमतौर पर दूसरी जगहों पर पाए जाने वाले बड़े डायनासोर से काफी छोटे थे। इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिली है कि अलग-थलग माहौल में जीव कैसे विकसित होते हैं।
800 से ज़्यादा जीवाश्म के टुकड़े
2023 की एक स्टडी के मुताबिक, सिर्फ पांच वर्ग मीटर के छोटे से इलाके में 800 से ज़्यादा जीवाश्म के टुकड़े मिले हैं। ये सभी उस समय के हैं जब डायनासोर धरती पर राज करते थे। वैज्ञानिकों का मानना है कि ये जीवाश्म किसी एक बड़ी तबाही वाली घटना के कारण जमा नहीं हुए थे, बल्कि बार-बार बाढ़ आने के कारण लंबे समय तक धीरे-धीरे जमा हुए थे।
लाखों साल पहले, यह इलाका नदियों और उथली झीलों वाला था। हड्डियां पानी के साथ बहकर शांत जगहों पर जमा हो गईं, यही वजह है कि वे इतनी अच्छी तरह से सुरक्षित हैं। जांच में पता चला कि हड्डियां न तो तेज़ बहाव से टूटी थीं और न ही जानवरों से ज़्यादा खराब हुई थीं। डायनासोर के साथ-साथ कछुओं, मगरमच्छों, मेंढकों और शुरुआती स्तनधारियों के अवशेष भी मिले हैं। सबसे खास खोज डायनासोर मैग्यारोसॉरस डैकस है। लगभग 100 साल पहले, एक वैज्ञानिक ने सुझाव दिया था कि इसका छोटा आकार इसकी उम्र के कारण नहीं, बल्कि एक खास बदलाव के कारण था, जिसे अब हम आइलैंड ड्वार्फिज्म कहते हैं। शुरुआत में उनके दावे पर शक किया गया, लेकिन बाद में हड्डियों की बनावट पर रिसर्च से पता चला कि ये डायनासोर पूरी तरह से बड़े हो चुके थे।
वैज्ञानिकों का मानना है कि उस समय, हाटेग इलाका समुद्र से घिरे एक द्वीप जैसा था। सीमित भोजन और जगह के कारण, इस इलाके के जीव धीरे-धीरे आकार में छोटे हो गए। यह खोज बताती है कि पर्यावरण जीवों के शरीर और जीवन को कैसे बदल सकता है। हाटेग बेसिन आज भी वैज्ञानिकों के लिए एक खुली किताब है, जिसमें धरती के प्राचीन अतीत के कई रहस्य छिपे हैं।