शोधकर्ताओं ने फसलों की वृद्धि के लिए बैक्टीरिया संरक्षित करने की तकनीक विकसित की
Delhi दिल्ली | वैज्ञानिकों ने एक नई तकनीक विकसित की, जो लाभकारी बैक्टीरिया को संरक्षित कर पौधों की वृद्धि और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा सकती है। यह तकनीक किसानों को बैक्टीरिया और कृषि रसायनों को एक साथ उपयोग करने में मदद करेगी. शोधकर्ताओं ने इसे कृषि उद्योग के लिए क्रांतिकारी खोज बताया।
उत्तरी कैरोलिना स्टेट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक नई तकनीक का सफल परीक्षण किया है, जिससे बैक्टीरिया को संरक्षित किया जा सकता है और बाद में फसलों पर लागू किया जा सकता है। यह बैक्टीरिया पौधों की वृद्धि को बढ़ावा देने के साथ-साथ कीटों और रोगों से भी बचाव करता है।
शोध के अनुसार, यह तकनीक पौधों के लिए अनुकूलित प्रोबायोटिक्स विकसित करने में मदद करेगी। वैज्ञानिकों ने दो प्रमुख लाभकारी बैक्टीरिया – स्यूडोमोनास सिमिया और एज़ोस्पिरिलम ब्रासिलेंस का उपयोग किया, जिनमें एक जैव कीटनाशक और दूसरा जैव उर्वरक के रूप में कार्य करता है।
कैसे काम करती है यह तकनीक?
इस तकनीक में एक विशेष इमल्शन का उपयोग किया जाता है, जिसमें खारा घोल, बायोडिग्रेडेबल तेल और सेल्यूलोज पॉलिमर होते हैं। यह इमल्शन बैक्टीरिया को सुरक्षित रखता है और इसे उर्वरकों तथा कीटनाशकों के साथ प्रभावी ढंग से मिलाने में सक्षम बनाता है।
शोध के परिणाम:
चार सप्ताह के परीक्षण के बाद, शोधकर्ताओं ने पाया कि इमल्शन में संग्रहीत बैक्टीरिया की संख्या सामान्य खारे घोल की तुलना में 200-500% अधिक थी। इसके अलावा, जब इसमें कीटनाशक मिलाया गया, तो इसके प्रभाव में कोई कमी नहीं आई, जिससे यह तकनीक कृषि उद्योग के लिए क्रांतिकारी साबित हो सकती है।
शोधकर्ता मानते हैं कि यह खोज कृषि उत्पादकों को कम उर्वरक और कीटनाशकों का उपयोग करने में मदद कर सकती है, जिससे पर्यावरणीय प्रभाव भी कम होगा।
निष्कर्ष:
यह तकनीक किसानों को फसल उत्पादन बढ़ाने और नुकसान कम करने में मदद कर सकती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह तरीका बड़े पैमाने पर अपनाए जाने पर कृषि उद्योग में नया बदलाव ला सकता है।