Ganesha Ji ज्योतिष न्यूज़: भगवान गणेश जी को दूर्वा (दूब घास) चढ़ाने का विशेष महत्व है। इसके पीछे धार्मिक, पौराणिक और वैज्ञानिक कारण बताए जाते हैं।
  धार्मिक और पौराणिक मान्यताएँ:
गणेश जी और अनलासुर दैत्य की कथा 
एक बार अनलासुर नामक राक्षस ने देवताओं और ऋषियों को परेशान करना शुरू कर दिया।
उसने सभी को निगलना शुरू कर दिया, जिससे त्राहि-त्राहि मच गई।
तब भगवान गणेश जी ने अनलासुर को निगल लिया, लेकिन इससे उनके शरीर में अत्यधिक गर्मी हो गई।
तब ऋषियों ने उन्हें दूर्वा घास खाने को दी, जिससे उनकी जलन शांत हो गई।
तभी से गणेश जी को दूर्वा चढ़ाने की परंपरा शुरू हो गई।
शास्त्रों में दूर्वा का महत्व  
स्कंद पुराण, गणेश पुराण और अन्य धर्मग्रंथों में कहा गया है कि गणेश पूजन में दूर्वा चढ़ाने से विशेष फल मिलता है।
दूर्वा गणपति जी को अतिप्रिय है और इसे अर्पित करने से सभी विघ्न दूर होते हैं।
  वैज्ञानिक दृष्टिकोण:
दूर्वा घास में औषधीय गुण होते हैं, जो शरीर की गर्मी को कम करने में सहायक होते हैं।
यह शीतलता प्रदान करती है, इसलिए इसे भगवान गणेश को चढ़ाने की परंपरा बनी।
  दूर्वा चढ़ाने की विधि:
गणेश जी को 21 दूर्वा की गांठ चढ़ानी चाहिए।
दूर्वा त्रिशूल के आकार की होनी चाहिए, तभी इसका फल प्राप्त होता है।
इसे गणेश जी के सिर या चरणों में अर्पित करना चाहिए।
  दूर्वा चढ़ाने के लाभ:
  सभी विघ्न और बाधाएँ दूर होती हैं।
  धन-समृद्धि में वृद्धि होती है।
  सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
  स्वास्थ्य में सुधार होता है।
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