नई दिल्ली: हिंदू धर्म में कजरी तीज का पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं और पति की लंबी उम्र व परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। कजरी तीज की रात चंद्रमा को अर्घ्य देने की भी विशेष परंपरा है। इस दौरान जल में कच्चा दूध मिलाकर चंद्रमा को अर्पित किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसके पीछे भगवान शिव से जुड़ी एक खास मान्यता है।

चंद्रमा को प्रिय है दूध का अर्पण
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्रमा को शीतलता और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। दूध को भी शुद्धता, पोषण और शुभता का प्रतीक माना गया है। इसलिए चंद्रमा को जल में दूध मिलाकर अर्घ्य देने से मन की शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होने की मान्यता है।
कहा जाता है कि दूध चंद्रमा की शीतल प्रकृति को दर्शाता है और इसे अर्पित करने से जीवन में सुख और सौभाग्य की कामना की जाती है।
महादेव से जुड़ा है चंद्रमा का संबंध
पौराणिक कथाओं के अनुसार, चंद्रमा भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान हैं। भगवान शिव को चंद्रशेखर भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है सिर पर चंद्रमा धारण करने वाले। मान्यता है कि चंद्रमा ने भगवान शिव की आराधना कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया था। इसी कारण शिव पूजा और चंद्रमा की उपासना के बीच विशेष संबंध माना जाता है। कजरी तीज पर चंद्रमा को दूध मिश्रित जल अर्पित करना इसी धार्मिक संबंध को दर्शाता है।
कजरी तीज पर क्यों दिया जाता है चंद्रमा को अर्घ्य?
कजरी तीज पर महिलाएं पूरे दिन व्रत रखती हैं और शाम को पूजा के बाद चंद्रमा के दर्शन करती हैं। इसके बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत पूरा करती हैं। धार्मिक मान्यता है कि चंद्रमा को अर्घ्य देने से वैवाहिक जीवन में प्रेम, विश्वास और सुख बना रहता है। महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और परिवार की खुशहाली के लिए यह पूजा करती हैं।
दूध मिलाकर अर्घ्य देने का धार्मिक अर्थ
दूध को पवित्रता और शुभता का प्रतीक माना जाता है।
चंद्रमा को मन का कारक माना गया है, इसलिए दूध अर्पित करने से मानसिक शांति की कामना की जाती है।
भगवान शिव और चंद्रमा के संबंध के कारण इस परंपरा का विशेष महत्व माना जाता है।
अर्घ्य देने की सही विधि
कजरी तीज के दिन चंद्रमा को अर्घ्य देते समय एक पात्र में साफ जल लें और उसमें थोड़ा कच्चा दूध मिलाएं। इसके बाद चंद्रमा को देखकर श्रद्धा के साथ जल अर्पित करें। पूजा के दौरान भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कजरी तीज का यह विधान महिलाओं के जीवन में सुख, सौभाग्य और पारिवारिक खुशहाली की कामना से जुड़ा हुआ है।
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