जनता से रिश्ता वेबडेस्क:  हम अपने धर्म को मानते तो बहुत हैं लेक‍िन क्‍या इसके बारे में सबकुछ जानते और समझते हैं? अगर नहीं तो हम आपके ल‍िए एक ऐसी श्रृंखला शुरू करने जा रहे हैं ज‍िसमें हम वैद‍िक सभ्‍यता, वैद‍िक काल, वेद (ऋग्‍वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद), वेदांत, वेदांग, ब्राह्मणग्रंथ, अरण्‍यक, उपन‍िषद, ज्‍योत‍िष, मनुस्‍मृति, याज्ञवल्‍क्‍य स्‍मृति नारद स्‍मृति, म‍िताक्षरा, पुराण, व‍िवाहों के प्रकार, महाकाव्‍यकाल, जैन धर्म, बौद्ध धर्म, भागवत धर्म/वैष्‍णव और शैव धर्म के साथ धर्म संबंधी अन्‍य व‍िषयों की जानकारी देते रहेंगे।

वैद‍िक सभ्‍यता से संबंध‍ित महत्‍वपूर्ण तथ्‍य
वैद‍िक सभ्‍यता के न‍िर्माता आर्य थे। आर्य एक वैद‍िक संस्‍कृत भाषा का शब्‍द है। इसका अर्थ होता है 'श्रेष्‍ठ।' आर्य एक भाषा सूचक शब्‍द है। ना क‍ि प्रजात‍ि सूचक नहीं। आर्यों को ल‍िप‍ि का ज्ञान नहीं था। इसल‍िए वे अपने ज्ञान को सुनकर एक-दूसरी पीढ़ी को सुनाकर पहुंचाते थे। इसल‍िए वैद‍िक साह‍ित्‍य को 'श्रुत‍ि साह‍ित्‍य' कहा जाता था।
वैद‍िक काल का व‍िभाजन जानें
वैद‍िक काल को दो कालों में व‍िभाज‍ित क‍िया गया है। इसमें पहला काल ऋग्‍वैद‍िक काल कहा जाता है। इसका समय (1500 ई.पू.- 1000 ई.पू.) रहा। दूसरा काल उत्‍तर वैद‍िक काल कहा जाता है। इसका समय (1000 ई.पू.- 600 ई.पू.) रहा।


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