Vat Savitri Vrat 2025: कब मनाया जाएगा वट सावित्री व्रत 27 या 28 मई, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Update: 2025-05-13 01:37 GMT
Vat Savitri Vrat 2025: मई सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास है, क्योंकि इस माह वट सावित्री का व्रत रखा जाएगा। यह व्रत पति की लंबी उम्र, तरक्की, खुशहाली और अच्छी सेहत के लिए रखा जाता है। इस दिन मुख्य रूप से सुहागिनें वटवृक्ष की पूजा करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और शिव का वास होता है, इसलिए इसकी उपासना करने से सुहागिन महिलाओं की सभी मनोकामनाएं पूरी व वैवाहिक जीवन में मधुरता बनी रहती है।
वट सावित्री हिंदू धर्म का प्रमुख पर्व है और उत्तर प्रदेश, बिहार समेत मध्य प्रदेश में इसे भव्य तरीके से मनाया जाता है। यहां महिलाएं एकजुट होकर पूजा-पाठ करते हुए देवी सावित्री और पति सत्यवान की कथा का स्मरण करती हैं। लेकिन इस साल इस पर्व को लेकर असमंजस बना हुआ है। ऐसे में आइए वट सावित्री व्रत की तिथि और पूजा विधि के बारे में जानते हैं।
कब रखा जाएगा वट सावित्री व्रत?
पंचांग के मुताबिक वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि पर रखा जाता है। इस साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि की शुरुआत 26 मई 2025 को दिन में 12 बजकर 11 मिनट पर हो रही है। इसका समापन अगने दिन यानी 27 मई 2025 को सुबह 8 बजकर 31 मिनट पर होगा। ऐसे में 26 मई 2025 को वट सावित्री व्रत का व्रत रखा जाएगा।
वट सावित्री व्रत 2025 पूजा का शुभ मुहूर्त:
वट सावित्री व्रत के दिन सुबह 8 बजकर 52 मिनट से लेकर 10 बजकर 25 मिनट तक शुभ चौघड़िया मुहूर्त बन रहा है। इसके अलावा सुबह 11 बजकर 51 मिनट से दोपहर 12 बजकर 46 मिनट तक अभिजित मुहूर्त बना रहेगा। वहीं वट सावित्री व्रत के दिन दोपहर में 3 बजकर 45 मिनट से 5 बजकर 28 मिनट तक भी पूजा का शुभ योग बन रहा है। आप इस अवधि में उपासना कर सकती हैं।
वट सावित्री व्रत 2025 शुभ योग:
26 मई 2025 को वट सावित्री व्रत के दिन भरणी नक्षत्र बन रहा है, जो सुबह 8:23 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा इस तिथि पर शोभन व अतिगण्ड योग का संयोग रहेगा। वट सावित्री के दिन अभिजित मुहूर्त सुबह 11:54 से दोपहर 12:42 तक रहेगा।
अगर पहली बार रख रहे हैं वट सावित्री व्रत, तो जान लें इसके नियम
वट सावित्री व्रत की पूजा विधि:
वट सावित्री के दिन सुबह ही स्नान के बाद साफ वस्त्रों को धारण कर लें।
अब पूरे घर में साफ-सफाई करते हुए गंगाजल का छिड़काव करें।
अब वट वृक्ष की पूजा करने से पहले पीले व लाल रंग के वस्त्र धारण करें।
इस दौरान सोलह श्रृंगार करना न भूलें।
अब सबसे पहले वट वृक्ष को प्रणाम करें और वहां सावित्री और सत्यवान की तस्वीर को स्थापित करें।
फिर एक लोटे में साफ जल भरें और वृक्ष की जड़ में अर्पित करें।
अब फूल, अक्षत, भीगा चना व गुड़ चढ़ाएं।
वट वृक्ष पर सात बार सूत लपेटते और परिक्रमा करें।
इसके बाद हाथ में चने लेकर वट सावित्री की कथा पढ़ें।
कुछ खास मंत्रों का जप करें।
अंत में फल और वस्त्रों का दान करें और वृक्ष को प्रणाम करें।
वट सावित्री व्रत की आरती
अश्वपती पुसता झाला।। नारद सागंताती तयाला।।
अल्पायुषी स त्यवंत।। सावित्री ने कां प्रणीला।।
आणखी वर वरी बाळे।।मनी निश्चय जो केला।।
दयावंत यमदूजा। सत्यवंत ही सावित्री।
भावे करीन मी पूजा। आरती वडराजा ।।
ज्येष्ठमास त्रयोदशी। करिती पूजन वडाशी ।।
त्रिरात व्रत करूनीया। जिंकी तू सत्यवंताशी।
आरती वडराजा ।।
स्वर्गावारी जाऊनिया। अग्निखांब कचळीला।।
धर्मराजा उचकला। हत्या घालिल जीवाला।
येश्र गे पतिव्रते। पती नेई गे आपुला।।
आरती वडराजा ।।
जाऊनिया यमापाशी। मागतसे आपुला पती।
चारी वर देऊनिया। दयावंता द्यावा पती।
आरती वडराजा ।।
पतिव्रते तुझी कीर्ती। ऐकुनि ज्या नारी।।
तुझे व्रत आचरती। तुझी भुवने पावती।।
आरती वडराजा ।।
पतिव्रते तुझी स्तुती। त्रिभुवनी ज्या करिती।।
स्वर्गी पुष्पवृष्टी करूनिया। आणिलासी आपुला पती।।
अभय देऊनिया। पतिव्रते तारी त्यासी।।
आरती वडराजा ।।
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