Vakratunda Chaturthi 2025: करें इन शक्तिशाली मंत्रों का जाप, गणेशजी हर संकट को करेंगे दूर
Religion Spirituality,धर्म अध्यात्म: इस वर्ष वक्रतुंड चतुर्थी (Vakratunda Chaturthi) का पर्व 11 अक्टूबर 2025, शनिवार को मनाया जाएगा। यह दिन भगवान श्रीगणेश को समर्पित है, जिन्हें विघ्नहर्ता, संकटमोचन और शुभ-लाभ देने वाला देवता माना जाता है। इस दिन विशेष रूप से "वक्रतुंड महाकाय" स्वरूप की पूजा की जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वक्रतुंड चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा एवं शक्तिशाली मंत्रों का जाप करने से जीवन में आ रहे सभी प्रकार के विघ्न, रोग, ऋण और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है। इस दिन गणेशजी को मोदक, दूर्वा और लाल फूल चढ़ाकर विशेष फल प्राप्त किए जा सकते हैं।
वक्रतुंड चतुर्थी 2025 तिथि और पूजा मुहूर्त:
तिथि: 11 अक्टूबर 2025, शनिवार
चतुर्थी तिथि आरंभ: 10 अक्टूबर को रात 09:42 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त: 11 अक्टूबर को रात 08:15 बजे
पूजा का शुभ समय: 11 अक्टूबर को प्रातः 06:15 से 08:30 तक (स्थानीय पंचांग अनुसार भिन्नता संभव)
वक्रतुंड चतुर्थी का धार्मिक महत्त्व
‘वक्रतुंड’ भगवान गणेश के 12 प्रसिद्ध नामों में से एक है। इसका अर्थ होता है — टेढ़ी सूंड वाले भगवान। इस स्वरूप में वे सभी प्रकार के विघ्नों का विनाश करते हैं।
वक्रतुंड चतुर्थी विशेष रूप से उन लोगों के लिए अत्यंत लाभकारी मानी जाती है:
जो जीवन में बार-बार बाधाएं झेल रहे हैं
जिनके काम अटक रहे हैं या सफलता नहीं मिल रही
जो मानसिक तनाव, पारिवारिक कलह या कर्ज से जूझ रहे हैं
इन शक्तिशाली मंत्रों का जाप करें वक्रतुंड चतुर्थी पर
1. वक्रतुंड गणेश मंत्र
"वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥"
इस मंत्र का 108 बार जाप करने से कार्यों में आने वाली अड़चनें दूर होती हैं और जीवन में स्थिरता आती है।
2. गणेश मूल मंत्र
"ॐ गं गणपतये नमः॥"
यह गणेशजी का बीज मंत्र है। इसका जाप रोज़ाना कम से कम 108 बार करने से बुद्धि, स्मरण शक्ति और निर्णय क्षमता में वृद्धि होती है।
3. गणेश गायत्री मंत्र
"ॐ एकदन्ताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि।
तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्॥"
यह मंत्र विद्यार्थियों, नौकरीपेशा और व्यापारियों के लिए बहुत प्रभावी है।
4. संकटमोचन गणेश मंत्र
"ॐ हं गं जं सं पं गं गणपतये वर वरद सर्वजनं में वशमानय स्वाहा॥"
इस मंत्र से जीवन के बड़े संकट भी टल सकते हैं। इसका जाप संकट की घड़ी में या विशेष व्रत पर अवश्य करना चाहिए।
पूजा विधि (व्रत के साथ)
प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें
घर के मंदिर या पूजा स्थान पर गणेशजी की मूर्ति/चित्र स्थापित करें
उन्हें रोली, अक्षत, दूर्वा, लाल फूल, मोदक और गुड़ अर्पित करें
दीपक और धूप जलाकर पूजा आरंभ करें
मंत्रों का जाप कर भगवान से कृपा की प्रार्थना करें
अंत में गणेश आरती करें और प्रसाद वितरित करें
व्रत का महत्व
वक्रतुंड चतुर्थी पर उपवास करने से शरीर और मन दोनों शुद्ध होते हैं। व्रती इस दिन सिर्फ फलाहार करते हैं या एक समय का सात्विक भोजन। कई लोग निर्जला उपवास भी रखते हैं।
व्रत के नियमों का पालन करने से:
मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं
परिवार में सुख-शांति बनी रहती है
नौकरी, करियर और व्यापार में आ रही रुकावटें दूर होती हैं
क्या कहती हैं आचार्य रमा त्रिपाठी (धार्मिक विशेषज्ञ):
“वक्रतुंड चतुर्थी साधना का दिन है। इस दिन मन से गणेशजी के मंत्रों का जाप करने पर व्यक्ति का भाग्य प्रबल होता है। विशेषकर यदि कोई लगातार असफलताओं से घिरा है, तो इस दिन की पूजा से जीवन में नया मोड़ आ सकता है।”
वक्रतुंड चतुर्थी का पर्व केवल पूजा का अवसर नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और जीवन में नई ऊर्जा लाने का विशेष दिन है। इस दिन भगवान गणेश की उपासना और मंत्र जप से सभी विघ्न दूर होते हैं, और व्यक्ति के सभी कार्य सफल होने लगते हैं।
इस 11 अक्टूबर को गणेशजी की कृपा पाने के लिए श्रद्धा से करें पूजा, व्रत और मंत्र जाप — विघ्नहर्ता स्वयं आपका मार्ग प्रशस्त करेंगे।