Tulsi Puja on Ekadashi: एकादशी पर तुलसी पूजा को लेकर शास्त्रों और पुराणों में कई विशेष मान्यताएँ बताई गई हैं। तुलसी भगवान विष्णु को प्रिय हैं और इन्हें लक्ष्मीजी का स्वरूप भी माना जाता है। यदि एकादशी के दिन तुलसी की विधिपूर्वक पूजा की जाए तो भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी दोनों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, तुलसी को माता लक्ष्मी का ही स्वरूप माना जाता है। तुलसी का एक नाम 'विष्णुप्रिया' भी है, जिसका अर्थ है 'भगवान विष्णु को प्रिय'। मान्यता के अनुसार, एकादशी के दिन तुलसी की पूजा करने से भगवान विष्णु बहुत प्रसन्न होते हैं और अपनी कृपा बरसाते हैं।
एकादशी के दिन तुलसी शालिग्राम विवाह की भी परंपरा है। शालिग्राम को भगवान विष्णु का ही स्वरूप माना जाता है। इस विवाह की रस्म निभाने से घर में सुख-समृद्धि आती है और सभी प्रकार के कष्ट दूर होते हैं।
तुलसी को बहुत ही पवित्र पौधा माना जाता है। यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। एकादशी के दिन तुलसी के पौधे के सामने दीपक जलाकर उसकी पूजा करने से घर का वातावरण शुद्ध होता है, जिससे लक्ष्मी का आगमन होता है।
एकादशी के दिन तुलसी पूजा करने से दाम्पत्य जीवन में मधुरता आती है। विवाहित महिलाओं को सौभाग्य और अखंड वैवाहिक सुख की प्राप्ति होती है।
एकादशी का व्रत और तुलसी की पूजा करने से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है। ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति एकादशी के दिन तुलसी का सेवन या पूजा करता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।
तुलसी की पूजा करने से घर में शांति और सौहार्द का वातावरण बनता है। घर में शांति होने पर माता लक्ष्मी स्वयं आकर्षित होती हैं। इससे परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम और सम्मान बढ़ता है, जो समृद्धि का एक महत्वपूर्ण अंग है।
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