गर्मी में शिवलिंग पर गलंती लगाने की परंपरा, नियमों के पालन से जुड़ा बताया गया धार्मिक महत्व

Update: 2026-05-22 12:20 GMT

Religion Desk धर्म डेस्क : धार्मिक परंपराओं में शिवलिंग की पूजा का विशेष महत्व माना गया है और गर्मियों के दौरान कई स्थानों पर भक्त शिवलिंग पर जलाभिषेक के साथ “गलंती” या “गलंतिका” का उपयोग करते हैं। इस प्रक्रिया में कपड़े या विशेष पात्र की सहायता से शिवलिंग पर लगातार बूंद-बूंद पानी टपकता रहता है।

आस्थावान लोगों का मानना है कि इस विधि से शिवलिंग पर निरंतर जल अर्पित होता रहता है, जिससे वातावरण ठंडा रहता है और साधक को भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह परंपरा विशेष रूप से गर्मी के मौसम में अधिक देखने को मिलती है, जब मंदिरों और घरों के पूजा स्थलों पर भक्त इस विधि को अपनाते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिवलिंग पर निरंतर जलधारा बनाए रखना “अभिषेक” का एक रूप माना जाता है, जो भगवान शिव को प्रसन्न करने का माध्यम है। ऐसा विश्वास है कि इससे मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और पारिवारिक सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

हालांकि, विद्वानों का कहना है कि इस प्रकार की पूजा-पद्धति का पूर्ण लाभ तभी मिलता है जब इसके साथ जुड़े नियमों और शुद्धता का पालन किया जाए। पूजा स्थल की स्वच्छता, जल की पवित्रता और सही विधि का पालन करना आवश्यक माना गया है।

धार्मिक परंपराओं में यह भी बताया गया है कि गलंती या जलधारा का प्रयोग करते समय अनुचित सामग्री या अशुद्ध जल का उपयोग नहीं करना चाहिए। साथ ही शिवलिंग की पूजा करते समय श्रद्धा और नियमबद्धता का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।

पंडितों के अनुसार, शिवलिंग पर जल अर्पण करते समय मानसिक एकाग्रता और भक्ति भाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि बाहरी विधि-विधान। माना जाता है कि बिना श्रद्धा के की गई पूजा का अपेक्षित फल नहीं मिलता।

फिलहाल गर्मी के मौसम में कई मंदिरों और घरों में यह परंपरा देखने को मिल रही है, जहां भक्त भगवान शिव की आराधना में गलंती का उपयोग कर रहे हैं। यह प्रथा धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा बनी हुई है।

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