Bikaner Panchmukha Hanuman Temple: राजस्थान का बीकानेर शहर अपनी ऐतिहासिक धरोहरों, प्राचीन मंदिरों और धार्मिक परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। यहां रानीबाजार औद्योगिक क्षेत्र में स्थित प्राचीन पंचमुखा हनुमान जी मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता भगवान हनुमान की पांच मुखों वाली प्रतिमा है, जिसके दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस धार्मिक स्थल का इतिहास बीकानेर के प्रसिद्ध रातीघाटी युद्ध से जुड़ा हुआ है। बताया जाता है कि लगभग 100 वर्ष पहले मीणा नाम के एक श्रद्धालु ने यहां निज मंदिर का निर्माण करवाया था। समय के साथ श्रद्धालुओं की आस्था बढ़ती गई और मंदिर का विस्तार होता गया। हाल ही में मंदिर के नवनिर्माण और जीर्णोद्धार का कार्य पूरा होने पर चार दिवसीय धार्मिक महोत्सव का आयोजन भी किया गया।
रातीघाटी युद्ध से जुड़ी है मंदिर की ऐतिहासिक मान्यता
बीकानेर का रातीघाटी युद्ध राजस्थान के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, यह युद्ध 26 अक्टूबर 1534 को बीकानेर के शासक राव जैतसी और मुगल शासक हुमायूं के भाई कामरान मिर्जा की सेनाओं के बीच हुआ था।स्थानीय परंपराओं में इस युद्ध को बीकानेर के स्वाभिमान और वीरता से जोड़कर देखा जाता है।
रानीबाजार स्थित पंचमुखा हनुमान मंदिर को भी रातीघाटी युद्ध की स्मृतियों से जुड़ा धार्मिक स्थल बताया जाता है। हालांकि, मंदिर और युद्ध के बीच प्रत्यक्ष ऐतिहासिक संबंध स्थापित करने वाले अभिलेखों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।इसके बावजूद श्रद्धालुओं के बीच इस मंदिर की प्राचीनता और उससे जुड़ी कथाओं का विशेष महत्व बना हुआ है।
100 साल पहले मीणा भक्त ने कराया था मंदिर का निर्माण
स्थानीय जानकारी के अनुसार, करीब एक शताब्दी पहले मीणा नाम के एक हनुमान भक्त ने इस स्थान पर छोटा निज मंदिर बनवाया था।बताया जाता है कि शुरुआत में मंदिर का स्वरूप सीमित था और आसपास के लोग यहां नियमित पूजा-अर्चना करने आते थे।धीरे-धीरे भगवान पंचमुखा हनुमान के प्रति लोगों की आस्था बढ़ने लगी। आसपास के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचने लगे।मंदिर के विकास में समय-समय पर स्थानीय श्रद्धालुओं और धार्मिक संस्थाओं का सहयोग मिलता रहा।हालांकि, मूल निर्माण की सटीक तारीख और निर्माणकर्ता से संबंधित विस्तृत ऐतिहासिक दस्तावेज सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं।
पांच मुखों वाली हनुमान प्रतिमा है विशेष आकर्षण
मंदिर में स्थापित पंचमुखा हनुमान जी की प्रतिमा भक्तों के लिए विशेष श्रद्धा का केंद्र है।हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान हनुमान के पंचमुखी स्वरूप में पांच मुखों का विशेष महत्व बताया गया है।इनमें पूर्व दिशा में हनुमान, दक्षिण में नरसिंह, पश्चिम में गरुड़, उत्तर में वराह और ऊपर की ओर हयग्रीव स्वरूप की मान्यता प्रचलित है।धार्मिक परंपराओं में पंचमुखी हनुमान की आराधना को साहस, शक्ति, सुरक्षा और बाधाओं से मुक्ति की कामना से जोड़ा जाता है।श्रद्धालु भगवान हनुमान के इस स्वरूप की पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल की प्रार्थना करते हैं।
मंदिर के जीर्णोद्धार से बदला धार्मिक परिसर का स्वरूप
मंदिर की प्राचीनता और श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए इसके नवनिर्माण तथा जीर्णोद्धार का कार्य कराया गया।
पंचमुखा सेवा संस्थान के तत्वावधान में इस कार्य को आगे बढ़ाया गया।मंदिर के नए स्वरूप में धार्मिक परंपराओं और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखने का प्रयास किया गया है।नवनिर्माण पूरा होने के उपलक्ष्य में अक्टूबर 2026 में धार्मिक कार्यक्रमों की विशेष श्रृंखला आयोजित की गई।इस दौरान भक्तों ने भगवान हनुमान की पूजा-अर्चना के साथ मंदिर के नए स्वरूप का स्वागत किया।
चार दिनों तक चला धार्मिक महोत्सव
मंदिर के नवनिर्माण पूर्णता महोत्सव और शरद पूर्णिमा महोत्सव के उपलक्ष्य में 23 से 26 अक्टूबर 2026 तक विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
इस अवसर पर अखंड रामचरितमानस पाठ, धार्मिक जागरण, संत-महात्माओं के प्रवचन और अन्य अनुष्ठानों का आयोजन किया गया।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।धार्मिक आयोजनों के दौरान मंदिर परिसर में भक्ति और उत्साह का वातावरण रहा।पंचमुखा सेवा संस्थान की ओर से आयोजित कार्यक्रमों में भगवान हनुमान की आराधना के साथ धार्मिक परंपराओं के संरक्षण पर भी जोर दिया गया।
भव्य शोभायात्रा में उमड़े श्रद्धालु
मंदिर के नवनिर्माण महोत्सव के अंतर्गत रविवार, 25 अक्टूबर को भव्य शोभायात्रा निकाली गई।यह शोभायात्रा रानीबाजार से शुरू होकर गंगाशहर और पांच नंबर रोड औद्योगिक क्षेत्र होते हुए वापस मंदिर परिसर पहुंची।शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालुओं ने भगवान हनुमान के जयकारे लगाए।कार्यक्रम के दौरान धार्मिक भजनों और मंगलध्वनि से वातावरण भक्तिमय बना रहा।शोभायात्रा में स्थानीय धार्मिक संगठनों और श्रद्धालुओं की भागीदारी देखने को मिली।
मंदिर शिखर पर हुई कलश स्थापना
चार दिवसीय धार्मिक महोत्सव का महत्वपूर्ण आयोजन मंदिर के शिखर पर कलश स्थापना रहा।26 अक्टूबर को संत-महात्माओं की मौजूदगी में मंदिर शिखर पर कलश स्थापना की गई।इस अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की गई।इसके अतिरिक्त रामचरितमानस पाठ, महाप्रसाद और सामूहिक महाआरती जैसे आयोजन भी किए गए।श्रद्धालुओं ने भगवान हनुमान की आराधना कर परिवार और समाज की सुख-शांति की कामना की।
मंगलवार और शनिवार को हनुमान भक्तों की विशेष आस्था
भगवान हनुमान की पूजा के लिए मंगलवार और शनिवार को विशेष महत्व दिया जाता है।इन दिनों श्रद्धालु हनुमान मंदिरों में जाकर पूजा-अर्चना करते हैं और सिंदूर, पुष्प तथा प्रसाद अर्पित करते हैं।कई श्रद्धालु हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और बजरंग बाण का पाठ भी करते हैं।धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान हनुमान को बल, बुद्धि और साहस का प्रतीक माना जाता है।रानीबाजार का पंचमुखा हनुमान मंदिर भी स्थानीय धार्मिक आस्था का महत्वपूर्ण स्थल बना हुआ है।बीकानेर की धार्मिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा
बीकानेर में करणी माता मंदिर, लक्ष्मीनाथ मंदिर और अन्य ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों की समृद्ध परंपरा रही है।
इसी धार्मिक विरासत में रानीबाजार स्थित पंचमुखा हनुमान मंदिर का अपना स्थान है।
यहां की पांच मुखों वाली प्रतिमा, मंदिर की स्थानीय ऐतिहासिक मान्यताएं और वर्षों से चली आ रही पूजा परंपरा इसे विशेष बनाती हैं।
मंदिर के नवनिर्माण और धार्मिक महोत्सव से इसकी पहचान को और विस्तार मिला है।