Swami Vivekananda: स्वामी विवेकानंद के इस काम से सीखें, सही-गलत का निर्णय करना

Update: 2025-08-06 07:14 GMT
Swami Vivekananda : बहुत साल पहले की बात है। बिल्ले नाम का एक लड़का था। उसकी खासियत यह थी कि वह खेलते समय पूरे मन से खेलता था और पढ़ते समय पूरी एकाग्रता से पढ़ाई करता था। वह होशियार और साहसी भी था। अपने इसी गुण के कारण वह ऊँचे पेड़ों पर चढ़ जाता था। यह सब देखकर उसके दादाजी बहुत डर जाते थे। उन्हें लगता था कि कहीं बिल्ले पेड़ से गिर न जाए। वह हमेशा बिल्ले को पेड़ों पर चढ़ने से मना करते थे, लेकिन वह उनकी बात नहीं मानता था और मन ही मन हँसता रहता था।
एक बार उसके दोस्तों ने उसे बड़े पेड़ पर न चढ़ने की सलाह दी। उन्होंने बिल्ले से कहा कि तुम्हारे दादाजी कह रहे थे कि इस पेड़ पर एक राक्षस रहता है। बिल्ले ने अपने दोस्तों की बात नहीं मानी और पेड़ पर चढ़ गया। पेड़ पर चढ़ने के बाद उसने अपने दोस्तों से कहा, 'राक्षस कहाँ है? मैं उससे एक बार मिलना चाहता हूँ।' बिल्ले की निडरता और साहस देखकर उसके दादाजी बहुत प्रभावित हुए। यही बालक आगे चलकर दुनिया में स्वामी विवेकानंद के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
मेरे कहने का तात्पर्य यह है कि निडरता मनुष्य का एक गुण है जो बचपन से ही आता है। मनुष्य अपने विवेक से किसी चीज़ के सही या गलत होने का निर्णय लेता है। सही और गलत में अंतर करने की क्षमता ही उसे निडर बनाती है।
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