Religion धर्म : ज्येष्ठ माह में पड़ने वाले दिनों के लंबे होने के साथ ही निर्जला एकादशी का व्रत भी विशेष महत्व रखता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस एकादशी का व्रत सभी एकादशियों के बराबर फल देने वाला माना गया है। इस दिन श्रद्धालु बिना जल ग्रहण किए व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु की आराधना करते हैं।
मान्यता है कि जो व्यक्ति निर्जला एकादशी का व्रत पूरी श्रद्धा के साथ करता है, उसे सभी एकादशियों के व्रत का फल प्राप्त होता है। इस दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व बताया गया है। अन्न, छाता, पंखा और फल जैसे वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि और शांति आती है।
धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में घड़े के दान को इस दिन सबसे श्रेष्ठ बताया गया है। माना जाता है कि जल से भरा घड़ा दान करने से व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है और उसके जीवन में सकारात्मकता बढ़ती है। विशेष रूप से निर्जला व्रत रखने वाले व्यक्ति द्वारा जल से भरा घड़ा दान करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
ऐसी मान्यता है कि यदि कोई व्यक्ति इस दिन निर्जला रहकर व्रत करता है और फिर जल से भरा घड़ा दान करता है, तो उसे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। साथ ही यह भी कहा जाता है कि इससे पापों का नाश होता है और जीवन में अच्छे परिणाम मिलते हैं।
घड़े का दान करते समय इसे स्वच्छ जल से भरकर किसी जरूरतमंद व्यक्ति, ब्राह्मण या सार्वजनिक स्थान पर रखा जा सकता है, ताकि प्यासे लोगों को इसका लाभ मिल सके। इस कार्य को सेवा भाव से करना अधिक फलदायी माना गया है।
इस वर्ष निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून, गुरुवार को किया जाएगा। इस दिन श्रद्धालु व्रत, पूजा और दान के माध्यम से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करेंगे।
कुल मिलाकर, निर्जला एकादशी केवल व्रत का ही नहीं बल्कि दान और सेवा का भी पर्व माना जाता है, जिसमें घड़े का दान सबसे विशेष और पुण्यदायी माना गया है।