ज्योतिष न्यूज़: चाहे आपके पास कितनी भी बड़ी डिग्री हो या आप कितने भी ज्ञानी क्यों न हों, लेकिन प्रयागराज के शिवकुटी स्थित शिव कचहरी मंदिर में मौजूद शिवलिंगों की सही गिनती कर पाना किसी के लिए भी संभव नहीं है। यहाँ हर बार गिनती करने पर संख्या अलग-अलग निकलती है - कभी 243, कभी 283 तो कभी इससे भी ज़्यादा। आइए जानते हैं इसके पीछे का रहस्य...
प्रयागराज के शिवकुटी में भगवान शिव से जुड़ा एक अनोखा शिव मंदिर स्थित है, जिसमें मौजूद शिवलिंगों की सही गिनती करने में लोगों के पसीने छूट जाते हैं। चाहे वह कितना भी ज्ञानी क्यों न हो, गिनती करने में हमेशा असफल रहता है।शिव कचहरी महादेव की स्थापना 1865 ई. में नेपाल के राजा राणा जनरल पदम जंग बहादुर ने की थी। इतने सारे शिवलिंग एक साथ मौजूद होने के कारण इसे भगवान शिव का कचहरी कहा जाता है।यहाँ मौजूद शिवलिंगों की गिनती हर बार अलग-अलग निकलती है - कभी 243, कभी 245 तो कभी 283 तक। यही रहस्य इसे और भी खास बनाता है। इस मंदिर में भगवान शिव के सभी स्वरूपों के शिवलिंग स्थापित हैं, जो इसे भक्तों के लिए एक अद्भुत और दिव्य स्थान बनाते हैं।
सावन के महीने में हर दिन इस अनोखे शिव मंदिर में हज़ारों भक्त आते हैं। भक्त भगवान शिव के दर्शन करते हैं और शिवलिंगों पर जलाभिषेक करते हैं। दूर-दूर से लोग धार्मिक अनुष्ठानों के लिए भी यहाँ पहुँचते हैं, जिसके कारण सावन में यह स्थान आस्था का एक प्रमुख केंद्र बन जाता है।
शिव कचहरी मंदिर के पुजारी दीपक जी महाराज बताते हैं कि यह मंदिर आस्था और भक्ति का प्रतीक है। सच्चे मन से यहाँ शीश नवाने वाले भक्तों पर महादेव अपनी कृपा बरसाते हैं। भक्त शिवलिंग पर बेलपत्र और जलाभिषेक चढ़ाकर अपनी मनोकामनाएँ प्रकट करते हैं, जो यहाँ पूरी भी होती हैं। यही कारण है कि सावन के महीने में यह मंदिर आस्था का केंद्र बन जाता है।
दीपक जी महाराज बताते हैं कि शिव कचहरी मंदिर में स्थित शिवलिंगों की गिनती करना अब तक किसी के लिए भी संभव नहीं हो पाया है। कई बार लोगों ने इन्हें गिनने की कोशिश की, लेकिन हर बार संख्या अलग-अलग निकली - कभी 243, कभी 283। पुजारी इसे भगवान शिव का चमत्कार मानते हैं और कहते हैं कि यहाँ शिवलिंगों की संख्या अपने आप घटती-बढ़ती रहती है, यही इस स्थान की सबसे बड़ी विशेषता है।
इस मंदिर में भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों जैसे चंदेश्वर, सिद्धेश्वर, नागेश्वर और शहीद भगवान के शिवलिंग स्थापित हैं। मान्यता है कि जब भगवान राम वनवास से अयोध्या लौट रहे थे, तो रावण वध के कारण उन पर ब्रह्महत्या का पाप लगा था। इस पाप से मुक्ति पाने के लिए उन्होंने यहाँ शिवलिंगों की स्थापना की और जलाभिषेक व पूजा-अर्चना की। यही कारण है कि यह स्थान धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
तब महर्षि भारद्वाज ने भगवान राम को सलाह दी थी कि वे पृथ्वी पर एक करोड़ शिवलिंग स्थापित करें और उनकी विधिवत पूजा करें, तभी उन पर लगा ब्रह्महत्या का पाप समाप्त होगा। इसी निर्देश के तहत भगवान राम ने प्रयागराज में शिवकचहरी मंदिर के पास कोटेश्वर महादेव की भी स्थापना की थी। यह स्थान आज भी श्रद्धालुओं के लिए आस्था और चमत्कार का केंद्र बना हुआ है।