Shaniwar Ke Upay: सावन के पहले शनिवार को शिवलिंग पर चढ़ाएं ये तीन चीजें, घरेलू समस्याओं से मिलेगी मुक्ति
Shaniwar Ke Upay: सावन 11 जुलाई 2025 से प्रारंभ हो गया है, जो 9 अगस्त 2025 तक रहने वाला है। इस माह भगवान शिव और देवी पार्वती की पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती हैं। मान्यता है कि सावन में भगवान शिव पूरी सृष्टि की कमान संभालते हैं। यही नहीं वह पृथ्वी पर आकर भक्तों पर विशेष कृपा भी बरसाते हैं। इसलिए इस माह शिवालयों में भव्य तरीके से जलाभिषेक और उनकी प्रिय चीजों से रुद्राभिषेक किया जाता है। इस दौरान सोमवार के अलावा शनिवार का भी खास महत्व है।
कहते हैं कि सावन शनिवार को भगवान शिव की आराधना करने से वह प्रसन्न होते हैं। इस दौरान शिवलिंग पर कुछ चीजों को अर्पित करना और भी कल्याणकारी माना गया है। इसके प्रभाव से शनि महाराज का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। साथ ही शनि दोष, तनाव, रोग और कर्ज जैसी समस्याएं भी कम होती हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि सावन के पहले शनिवार को शिवलिंग पर क्या अर्पित करना चाहिए।
सावन के पहले शनिवार को करें ये तीन आसान उपाय:
शनिवार के दिन शिवलिंग पर सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ होता है। यह उपाय आपका भाग्योदय कर सकता है। साथ ही सेहत में चल रही परेशानियां भी दूर कर सकता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन के पहले शनिवार को शिवलिंग पर काले तिल और जल से अभिषेक करें। इससे तनाव, रोग और शनि दोष से छुटकारा मिल सकता है।
सावन के पहले शनिवार को आप शिवलिंग पर शमी पत्र अर्पित करें। इससे करियर में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
शनि गायत्री मंत्र:
ॐ शनैश्चराय विदमहे छायापुत्राय धीमहि ।
शनि बीज मंत्र
ॐ प्रां प्रीं प्रों स: शनैश्चराय नमः ।।
शनि स्तोत्र
ॐ नीलांजन समाभासं रवि पुत्रं यमाग्रजम ।
छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम ।।
शनि पीड़ाहर स्तोत्र
सुर्यपुत्रो दीर्घदेहो विशालाक्ष: शिवप्रिय: ।
दीर्घचार: प्रसन्नात्मा पीडां हरतु मे शनि: ।।
तन्नो मंद: प्रचोदयात ।।
महामृत्युंजय मंत्र:
ऊँ हौं जूं स: ऊँ भुर्भव: स्व: ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
ऊर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ऊँ भुव: भू: स्व: ऊँ स: जूं हौं ऊँ।।
सुख और शांति प्राप्त करने का मंत्र
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्!
शिव मूल मंत्र: ॐ नमः शिवाय
भगवान शिव के प्रभावशाली मंत्र
ओम साधो जातये नम:।। ओम वाम देवाय नम:।।
ओम अघोराय नम:।। ओम तत्पुरूषाय नम:।।
ओम ईशानाय नम:।। ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय।।