Shani Dev Ki Pooja: जानें शनिदेव को तेल चढ़ाने की सही विधि, इस मंत्र के जाप से बरसेगी कृपा

Update: 2025-06-20 04:47 GMT
Shani Dev Ki Pooja: ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को न्याय, कर्म और दंड के अधिपति के रूप में जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि मनुष्य के गलत कार्यों से शनिदेव अप्रसन्न हो जाते हैं, जिससे उसे साढ़ेसाती और ढैय्या जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ता है। वहीं यदि व्यक्ति अच्छे कर्म करता है, तो उसे शनि देव की कृपा प्राप्त होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनिवार को सूर्यास्त के बाद शनि देव की पूजा करने से उनकी विशेष कृपा मिलती है। इस दिन शनि देव को सरसों का तेल अर्पित करना और पीपल के वृक्ष के नीचे दीप जलाने की परंपरा है।
शनि देव को तेल चढ़ाने के नियम:
शनि देव की पूजा करते समय नियमों का विशेष रूप से ध्यान रखने की आवश्यकता होती है। इस दौरान आपकी जरा सी गलती आप पर भारी पड़ सकती है। इसलिए कहा जाता है कि शनि देव को केवल लोहे के पात्र से ही तेल अर्पित करना चाहिए।
अर्पित करने के लिए सरसों या तिल के तेल का ही उपयोग करें, क्योंकि माना जाता है कि जब शनि देव को कष्ट हुआ था, तब हनुमान जी ने उन्हें यही तेल लगाया था। ध्यान रहे कि तेल चढ़ाते समय दृष्टि केवल उनके चरणों पर रखें, क्योंकि शनि देव की आंखों में देखने से बचना चाहिए।
पूजा के दौरान मन में किसी भी प्रकार का संदेह या नकारात्मक विचार न रखें। साथ ही पवित्रता और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। तेल अर्पित करते समय "ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः" मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है।
शनि देव को तेल चढ़ाने का महत्व:
ऐसी मान्यता है कि शनिवार को शनि देव पर सरसों या काले तिल का तेल चढ़ाने से जीवन के संकट दूर होते हैं। इसके अलावा यह साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव को कम करने में सहायक होता है। जो व्यक्ति नियमित रूप से शनि देव की पूजा करता है, उसे सफलता, समृद्धि और शनि देव का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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