Sawan Pradosh Vrat: आज है सावन का पहला प्रदोष व्रत, इस शुभ मुहूर्त में करें भगवान शिव की पूजा
Sawan Pradosh Vrat: प्रदोष व्रत हर महीने में दो बार आता है, एक शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को और दूसरा कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को। यह व्रत पूर्णतः भगवान शिव को समर्पित है। इस समय सावन माह चल रहा है और सावन में इस व्रत का महत्व और भी बढ़ जाता है। सावन का पहला प्रदोष व्रत 22 जुलाई को रखा जाएगा। इस बार यह व्रत मंगलवार को पड़ रहा है, इसलिए इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है।
भौम प्रदोष व्रत का महत्व:
भौम प्रदोष व्रत के दिन शिवजी की आराधना करने से जीवन की कई बाधाएं दूर होती हैं। विशेष रूप से मांगलिक दोष से ग्रस्त जातकों के लिए यह दिन अत्यंत फलदायी होता है। इसके अतिरिक्त करियर से जुड़ी रुकावटें भी इस व्रत से कम हो सकती हैं। साथ ही हनुमान जी की कृपा भी साधक को प्राप्त होती है|
प्रदोष व्रत का तिथि और मुहूर्त:
दृक पंचांग के अनुसार इस साल सावन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का आरंभ 22 जुलाई को सुबह 7:05 बजे होगा और यह तिथि 23 जुलाई को सुबह 4:39 बजे तक मान्य रहेगी। प्रदोष व्रत का पालन 22 जुलाई को ही किया जाएगा।
इस दिन पूजा के लिए प्रदोष काल का समय शाम 7:18 बजे से रात 9:22 बजे तक शुभ रहेगा। साथ ही दिन के अन्य शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:14 से 4:56 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 से 12:55 बजे तक
प्रदोष व्रत में क्या अर्पित करें:
इस दिन शिवजी को उनके प्रिय भोग अर्पित करना चाहिए, जैसे खीर, बर्फी, मालपुआ, ठंडाई और भांग। शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, शमी और कनेर के फूल भी चढ़ाएं। मान्यता है कि इन भोग और पुष्पों से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर कृपा करते हैं।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान:
इस दिन तामसिक भोजन से परहेज करें। नमक का सेवन न करना श्रेष्ठ माना जाता है। पूजा में तुलसी के पत्ते, नारियल का टुकड़ा, टूटे चावल, और केतकी के फूल नहीं चढ़ाने चाहिए। ये सभी वस्तुएं शिव पूजा में वर्जित मानी गई हैं।