Sawan Bhaum Pradosh Vrat Katha: आज है सावन का पहला प्रदोष व्रत, पढ़ें ये पवित्र कथा

Update: 2025-07-22 03:10 GMT
Sawan Bhaum Pradosh Vrat Katha: सावन में पड़ने वाले प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। कहते हैं इस दिन जो भक्त सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा-अर्चना करता है उसके जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। आज यानी 22 जुलाई को सावन का पहला प्रदोष व्रत है। ऐसे में जो भी भक्त आज व्रत रख रहे हैं वो प्रदोष काल में शिव की विधि विधान पूजा जरूर करें। बता दें आज पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 7 बजकर 18 मिनट से लेकर रात 9 बजकर 29 मिनट तक रहेगा। यहां आप जानेंगे आज के प्रदोष व्रत के दिन कौन सी कथा पढ़नी है।
सावन भौम प्रदोष व्रत कथा:
मंगलवार प्रदोष व्रत कथा अनुसार एक समय की बात है एक नगर में एक वृद्ध महिला रहती थी। जिसका एक ही पुत्र था। वृद्धा भगवान हनुमान की बड़ी भक्त थी। वह प्रत्येक मंगलवार को नियमपूर्वक व्रत रखती थी। एक दिन भगवान हनुमानजी ने अपनी भक्तिनी की श्रद्धा का परीक्षण करने का विचार किया। जिसके लिए हनुमानजी साधु का रूप लेकर वृद्धा के घर गए और पुकारने लगे कि है कोई हनुमान भक्त! जो हमारी इच्छा पूर्ण करे? जैसे ही उनकी आवाज वृद्धा के कान में पड़ी वह जल्दी से बाहर आई और साधु को प्रणाम कर बोली- आज्ञा महाराज!
वेशधारी साधु के रूप में हनुमान जी बोले- मैं भूखा हूं, भोजन करूंगा, तुम थोड़ी जमीन लीप दो। वृद्धा हाथ जोड़कर बोली- हे महाराज! लीपने और मिट्टी खोदने के अतिरिक्त आप जो भी काम कहेंगे मैं अवश्य करूंगी। तब साधु ने तीन बार प्रतिज्ञा कराने के बाज वृद्धा से कहा कि तू अपने बेटे को बुला। मैं उसकी पीठ पर आग जलाकर भोजन बनाऊंगा। वृद्धा घबरा गई लेकिन प्रतिज्ञाबद्ध होने की वजह से उसने अपने पुत्र को बुलाकर साधु को सौंप दिया। वेशधारी साधु ने वृद्धा के हाथों से ही उसके पुत्र को पेट के बल लिटवाया और फिर उसकी पीठ पर आग जलवाई। दु:खी मन से वृद्धा अपने घर में चली गई।
भोजन बनाकर साधु ने वृद्धा को आवाज लगाई और कहा कि भोजन बन गया है। वृद्धा आई लेकिन वो बेटे के जाने से दुखी थी। तब वेशधारी के रूप में हनुमान जी बोले कि तुम अपने पुत्र को पुकारो ताकि वह भी आकर भोजन कर लें। इस पर वृद्धा ने कहा कि उसका नाम लेकर मुझे और कष्ट न दें। लेकिन साधु महाराज के बार-बार कहने पर वृद्धा ने अपने पुत्र को आवाज लगाई। मां की आवाज सुनते ही बेटा सामने आ गया। अपने पुत्र को जीवित देख वृद्धा साधु के चरणों में गिर पड़ी। तब हनुमानजी ने वृद्धा को अपने वास्तविक रूप के दर्शन दिए और उसे आशीर्वाद दिया।
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