धर्म: कांवड़ यात्रा हिंदू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण मानी गई है. सावन माह में इस यात्रा को किया जाता है. साल 2025 में कांवड़ यात्रा की शुरूआत 11 जुलाई से हो रही है. कांवड़ के दौरान लाखों श्रद्धालु कांवड़ लेकर गंगा नदी का पवित्र जल लेकर आते हैं, और शिवलिंग पर चढ़ाते हैं. कांवड़ यात्रा को शिव भक्ति का सरल रूप माना जाता है|
भोलेनाथ के सबसे बड़े भक्त रावण के भी भोलेनाथ का अभिषेक किया था. इस बात पर सवाल पर उठते हैं कि क्या बच्चे कांवड़ यात्रा कर सकते हैं. कांवड़ यात्रा एक धार्मिक यात्रा है तो बच्चे इस यात्रा में भाग ले सकते हैं. कांवड़ यात्रा में अगर कोई भाग लेना चाहता है तो इसकी कोई उम्र नहीं होती है. बच्चे कांवड़ यात्रा में अपने माता-पिता और अभिभावकों के साथ शामिल हो सकते हैं. लेकिन अगर बच्चे इस कांवड़ यात्रा में जाते हैं तो विशेष बातों का ध्यान रखना जरूरी है|
बच्चों के साथ कांवड़ यात्रा में रखें इन बातों का ख्याल:
कांवड़ यात्रा के दौरान बच्चों को भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से उनका ध्यान रखना चाहिए और उन्हें खोने से बचाना चाहिए.
कांवड़ यात्रा में पैदल चलना पड़ता है और गर्मी, बारिश, धूप और थकान का सामना करना पड़ता है. इसीलिए बच्चों के साथ इन सब चीजों का ध्यान रखना चाहिए|
बच्चों को भी कांवड़ यात्रा के नियमों का पालन करना चाहिए.
बड़े लोगों को नशीली चीजों से दूर रहना चाहिए इसका असर बच्चों पर पड़ सकता है|
कांवड़ यात्रा के दौरान शिव जी के मंत्रों का जाप करना चाहिए.
यात्रा को प्लान करते समय बच्चों का जरूरी सामान साथ ले जाना ना भूलें|
बच्चे को अगर कांवड़ यात्रा के लिए लेकर जा रहे हैं को उनकी सुरक्षा का पूरा ख्याल रखें|