Vrindavan वृंदावन: प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज के दरबार में आस्था का सैलाब लगातार उमड़ता रहता है। देश के कोने-कोने से भक्त यहां अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं। खेल जगत के सितारे हों या फिल्मी दुनिया की नामचीन हस्तियां, सभी प्रेमानंद महाराज के आशीर्वाद की कामना करते रहे हैं। इसी कड़ी में हाल ही में 2024 बैच के नवनियुक्त भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी भी वृंदावन पहुंचे और प्रेमानंद महाराज से आशीर्वाद व मार्गदर्शन प्राप्त किया। इन अधिकारियों में 2024 बैच की टॉपर शक्ति दुबे भी शामिल थीं। सभी अधिकारी अपने सेवाकाल की शुरुआत से पहले प्रेमानंद महाराज से गुरु मंत्र लेने उनके आश्रम पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने महाराज से यह जानना चाहा कि शासन और प्रशासन की जिम्मेदारी निभाते समय किन बातों का विशेष ध्यान रखा जाए, जिससे वे देश और समाज की बेहतर सेवा कर सकें।
नवनियुक्त IAS अधिकारियों ने प्रेमानंद महाराज से कहा कि उनकी सेवाओं की अभी शुरुआत है और वे चाहते हैं कि उनका कार्यकाल ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और जनसेवा की भावना से परिपूर्ण रहे। उन्होंने महाराज से पूछा कि ऐसा क्या करें जिससे वे भारत सरकार की सच्चे मन से सेवा कर सकें और अपने दायित्वों का सही निर्वहन कर पाएं। इस पर प्रेमानंद महाराज ने अधिकारियों को जीवन और प्रशासन से जुड़ा एक गहरा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भय और प्रलोभन ही ऐसे तत्व हैं, जो व्यक्ति को धर्म और कर्तव्य के मार्ग से भटका देते हैं। यदि व्यक्ति इन दोनों से स्वयं को दूर रखे और निष्ठा से अपने कर्तव्यों का पालन करे, तो वही सच्ची भक्ति और सच्ची सेवा है।
प्रेमानंद महाराज ने कहा कि जब कोई अधिकारी भय से मुक्त होकर और प्रलोभनों से ऊपर उठकर निर्णय लेता है, तब वह न केवल स्वयं को बल्कि पूरे समाज को दिशा देता है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे अपने हर कार्य में भगवान का स्मरण रखें और सेवा को ही साधना मानें। यही भाव उन्हें कठिन परिस्थितियों में भी सही रास्ते पर बनाए रखेगा। इस अवसर पर प्रेमानंद महाराज ने नवनियुक्त अधिकारियों को भगवद गीता के उपदेशों से भी अवगत कराया। उन्होंने कर्मयोग, निष्काम कर्म और धर्म के सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बिना फल की चिंता किए किया गया कर्म ही सच्चा कर्म है। एक अधिकारी का धर्म है कि वह निष्पक्षता, सत्य और न्याय के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करे।
आश्रम में मौजूद श्रद्धालुओं ने इस दृश्य को भावुक क्षण बताया, जब देश की प्रशासनिक बागडोर संभालने जा रहे युवा अधिकारी संत के चरणों में बैठकर मार्गदर्शन प्राप्त कर रहे थे। आश्रम परिसर में आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला और सभी अधिकारियों ने महाराज के उपदेशों को जीवन में उतारने का संकल्प लिया। प्रेमानंद महाराज के इस संदेश को प्रशासनिक सेवा से जुड़े लोगों के लिए एक नैतिक मार्गदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। यह मुलाकात इस बात का प्रतीक है कि आधुनिक प्रशासन और आध्यात्मिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाकर ही देश को सशक्त दिशा दी जा सकती है।
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