Nirjala Ekadashi पर करें तुलसी से जुड़े खास उपाय, मनोकामना होगी पूरी

Update: 2026-06-24 12:56 GMT
Nirjala Ekadashi ज्योतिष न्यूज़: हिंदू धर्म में प्रत्येक तिथि और वार का अपना विशेष महत्व होता है। हर महीने में दो एकादशी तिथियां आती हैं, एक शुक्ल पक्ष में और दूसरी कृष्ण पक्ष में। हालांकि सभी एकादशियों का धार्मिक महत्व है, लेकिन साल भर में आने वाली 24 एकादशियों में निर्जला एकादशी को सबसे खास माना जाता है। यह व्रत ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और उन्हें विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।
निर्जला एकादशी का व्रत जीवन में सकारात्मकता, सुख-शांति और समृद्धि लेकर आता है। यह व्रत न केवल इच्छाओं की पूर्ति करता है, बल्कि परिवार में खुशहाली और मानसिक संतुलन भी प्रदान करता है। एकादशी के दिन तुलसी पूजन का विशेष महत्व माना गया है। यदि ज्येष्ठ माह की अंतिम एकादशी पर तुलसी से जुड़े कुछ उपाय किए जाएं, तो आने वाला समय सुखद और समृद्ध हो सकता है।
निर्जला एकादशी का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, निर्जला एकादशी अत्यंत फलदायी व्रतों में से एक है। ऐसा कहा जाता है कि इस व्रत को विधिपूर्वक करने से वर्ष भर की सभी एकादशियों के बराबर पुण्य मिलता है। इस दिन श्रद्धालु अन्न और जल दोनों का त्याग करते हैं। सच्चे मन और संयम के साथ किया गया यह व्रत भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ माध्यम माना जाता है।
तुलसी से जुड़े उपाय जरूर करें
यदि मेहनत के बावजूद आर्थिक स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है या धन टिक नहीं रहा है, तो निर्जला एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिपूर्वक पूजा करें। कच्चे दूध में तुलसी मंजरी मिलाकर भगवान का अभिषेक करने से आर्थिक बाधाएं दूर होने और धन वृद्धि के योग बनते हैं।
अगर करियर में लगातार रुकावटें आ रही हैं, तो इस दिन तुलसी माता के सामने 11, 21 या 51 दीपक जलाकर तुलसी चालीसा का पाठ करें। मान्यता है कि इससे सफलता के नए रास्ते खुलते हैं और बाधाएं दूर होती हैं।
निर्जला एकादशी पर तुलसी माता को श्रृंगार सामग्री अर्पित करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
यदि विवाह में देरी या बाधाएं आ रही हैं, तो इस दिन तुलसी माता और शालिग्राम भगवान का विधि-विधान से पूजन करें। इससे वैवाहिक जीवन से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं और घर में सुख-शांति का वातावरण बनता है।
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