Nirjala Ekadashi 2025: निर्जला एकादशी पर तुलसी के ये 3 उपाय करेंगे कमाल, जीवन के सारे कष्ट होंगे दूर
Nirjala Ekadashi 2025: सनातन धर्म में एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है, खासकर जब बात निर्जला एकादशी की हो। यह व्रत भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए रखा जाता है। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी जिसे निर्जला एकादशी कहते हैं, इस बार 6 जून 2025 को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की भक्ति भाव से पूजा करने से न केवल सभी पापों से मुक्ति मिलती है, बल्कि जीवन में सुख, शांति और समृद्धि भी आती है।
इस पावन अवसर पर तुलसी से जुड़े कुछ विशेष उपाय करने का भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि भगवान विष्णु को तुलसी बहुत प्रिय है और इस दिन अगर तुलसी के जरिए कुछ सरल उपाय किए जाएं तो भगवान विष्णु जल्द प्रसन्न होते हैं। इस बार एकादशी तिथि 6 जून को दोपहर 2:15 बजे से लग रही है, इसलिए उदया तिथि के अनुसार व्रत 6 जून को ही रखा जाएगा। अगर इन उपायों का पालन भक्ति भाव और विधि से किया जाए तो जीवन की कई समस्याओं से मुक्ति मिल सकती है।
तुलसी से जुड़े उपाय :
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए निर्जला एकादशी पर कुछ विशेष उपाय किए जा सकते हैं। इस दिन मां लक्ष्मी को श्रद्धा से श्रीफल अर्पित करें, फिर तुलसी के पौधे की विधिपूर्वक पूजा करें। ऐसा करने से भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है।
इस दिन एक और महत्वपूर्ण उपाय यह है कि तुलसी की मंजरी (फूल) को भगवान विष्णु के चरणों में अर्पित करें। मान्यता है कि इस साधारण-से दिखने वाले कार्य से भी भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं, और जीवन में सुख-समृद्धि का प्रवाह शुरू होता है। इससे पुराने कष्ट और बाधाएं भी दूर होने लगती हैं।
शाम के समय, तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाएं और उसकी ग्यारह बार परिक्रमा करें। यह उपाय जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने में सहायक होता है। इन सरल लेकिन प्रभावशाली उपायों को श्रद्धा और आस्था से करने पर विष्णु-लक्ष्मी की कृपा सहज ही प्राप्त हो सकती है।
निर्जला एकादशी व्रत 2025 में खास बात यह है कि इस बार एकादशी तिथि दो दिनों तक फैली रहेगी। पंचांग के अनुसार, यह पवित्र तिथि 6 जून 2025 को तड़के 2:15 बजे से शुरू होकर 7 जून को सुबह 4:47 बजे तक रहेगी। यानी एकादशी तिथि लगभग 24 घंटे तक बनी रहेगी, और दोनों ही दिन उदयातिथि का संयोग रहेगा।
शास्त्रीय नियमों के अनुसार, जब एकादशी दो दिन आती है, तो गृहस्थ जीवन जीने वालों को व्रत पहले दिन यानी 6 जून को ही रखना चाहिए। हालांकि सामान्यत: यह व्रत 24 घंटे के लिए रखा जाता है, लेकिन इस बार व्रत का पारण अगले दिन दोपहर में होने के कारण, व्रत की अवधि 32 घंटे 21 मिनट तक हो सकती है।
व्रत पारण का समय: 7 जून को दोपहर 1:44 बजे से शाम 4:31 बजे के बीच रखा गया है। जो भक्त 6 जून को निर्जला एकादशी का व्रत रखेंगे, वे 7 जून को इस निर्धारित समय पर व्रत का पारण कर सकते हैं।