हरिद्वार: उत्तराखंड के हरिद्वार में गंगा स्नान करने की इच्छा लेकर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए राहत भरी खबर है। दिवाली से ठीक पहले प्रसिद्ध हरकी पैड़ी घाट पर एक बार फिर गंगाजल की धारा लौट आई है। पिछले दिनों गंगनहर की वार्षिक सफाई और मरम्मत के चलते घाटों पर पानी का प्रवाह लगभग बंद हो गया था। इससे गंगा स्नान के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को निराशा का सामना करना पड़ रहा था। अब उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की ओर से हरकी पैड़ी तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। हालांकि, अभी गंगा में पहले जैसी तेज और गहरी जलधारा नहीं है। घाटों पर फिलहाल करीब 3 से 4 फीट पानी ही छोड़ा गया है। इससे दिवाली और गोवर्धन पूजा के दौरान हरिद्वार पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को कुछ राहत जरूर मिलेगी।
पांच दिन बाद हरकी पैड़ी पर लौटी रौनक
हरकी पैड़ी हरिद्वार के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में शामिल है। यहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु गंगा स्नान और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। विशेष रूप से दिवाली, गोवर्धन पूजा और अन्य धार्मिक पर्वों पर यहां श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है।
लेकिन इस बार गंगनहर की वार्षिक बंदी के कारण हरकी पैड़ी पर गंगा का जलस्तर काफी नीचे चला गया था। स्थिति ऐसी हो गई थी कि श्रद्धालुओं को आचमन करने के लिए भी पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा था। कई लोग गंगा स्नान करने के बजाय दूसरे घाटों की ओर जाने को मजबूर थे।
अब उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की ओर से पानी की अस्थायी व्यवस्था किए जाने के बाद हरकी पैड़ी पर फिर से श्रद्धालुओं की गतिविधियां बढ़ने लगी हैं। घाटों पर पानी पहुंचने से तीर्थ पुरोहितों, पंडों और स्थानीय कारोबारियों को भी राहत मिली है। 
आखिर हरकी पैड़ी पर क्यों बंद किया गया था पानी?
दरअसल, हर साल दशहरे के आसपास ऊपरी गंगनहर की वार्षिक सफाई और मरम्मत के लिए पानी का प्रवाह रोक दिया जाता है। इस बार भी 21 अक्टूबर 2026 से गंगनहर की बंदी शुरू की गई थी। यह प्रक्रिया दिल्ली, उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में पानी पहुंचाने वाली नहर व्यवस्था की सफाई और रखरखाव के लिए जरूरी है।
इस दौरान नहर में जमा गाद हटाने, किनारों की मरम्मत और दूसरी तकनीकी समस्याओं को ठीक करने का काम किया जाता है। इसके अलावा हरिद्वार में आने वाले अर्धकुंभ 2027 को देखते हुए कई बुनियादी निर्माण कार्य भी किए जा रहे हैं।
इस बार हरकी पैड़ी और आसपास के घाटों की मरम्मत के साथ नए पुलों और घाटों का निर्माण भी किया जा रहा है। यही वजह है कि फिलहाल गंगा का पूरा पानी नहीं छोड़ा गया है। 
संजय पुल के नीचे बनाया गया अस्थायी बांध
हरकी पैड़ी तक गंगाजल पहुंचाने के लिए उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग ने विशेष व्यवस्था की है। इसके तहत संजय पुल के नीचे मिट्टी से भरी बोरियों की मदद से एक अस्थायी बांध बनाया गया। इस व्यवस्था के जरिए गंगा के पानी को हरकी पैड़ी की ओर मोड़ा गया।
इसके बाद घाटों तक पानी पहुंचना शुरू हुआ और श्रद्धालुओं को दोबारा गंगा में स्नान करने का अवसर मिला। हालांकि, यह व्यवस्था सीमित जलप्रवाह के साथ की गई है। इसलिए फिलहाल श्रद्धालुओं को पहले की तरह गहरी जलधारा में डुबकी लगाने की सुविधा नहीं मिल रही है।
अभी सिर्फ घुटनों तक बह रहा है पानी
हरकी पैड़ी पर गंगाजल लौटने के बावजूद श्रद्धालुओं को यह ध्यान रखना होगा कि नदी अभी पहले की तरह लबालब नहीं भरी है। घाटों पर करीब 3 से 4 फीट पानी बह रहा है। ऐसे में कई स्थानों पर पानी घुटनों तक ही पहुंच रहा है।
प्रशासन दिवाली की शाम होने वाली गंगा महाआरती के दौरान श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा देने के लिए जलस्तर थोड़ा और बढ़ाने पर भी विचार कर सकता है। हालांकि, निर्माण कार्यों और मरम्मत की स्थिति को देखते हुए फिलहाल सामान्य जलप्रवाह बहाल नहीं हुआ है। 
अर्धकुंभ 2027 की तैयारियों के लिए हो रहे निर्माण कार्य
हरिद्वार में वर्ष 2027 में अर्धकुंभ का आयोजन होना है। इसे ध्यान में रखते हुए धार्मिक स्थलों और घाटों पर सुविधाओं को बेहतर बनाने का काम चल रहा है। नए पुलों का निर्माण, घाटों की मरम्मत और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विकास इसी तैयारी का हिस्सा है।
इन कार्यों का उद्देश्य भविष्य में हरिद्वार पहुंचने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्यवस्था उपलब्ध कराना है। अर्धकुंभ के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में घाटों की मजबूती, आवागमन और स्नान की सुविधाओं को बेहतर बनाना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण है।
श्रद्धालुओं के साथ व्यापारियों को भी मिली राहत
हरकी पैड़ी पर पानी कम होने का असर केवल श्रद्धालुओं पर ही नहीं पड़ा था, बल्कि इससे स्थानीय कारोबार भी प्रभावित हुआ था। तीर्थ पुरोहितों, पूजा सामग्री बेचने वाले दुकानदारों, फूल-प्रसाद विक्रेताओं और अन्य व्यापारियों का कारोबार काफी हद तक गंगा स्नान के लिए आने वाले लोगों पर निर्भर करता है।
जब घाटों पर पानी नहीं था, तब कई श्रद्धालु दूसरे घाटों पर चले जा रहे थे। इससे हरकी पैड़ी क्षेत्र में सामान्य दिनों की तुलना में कम भीड़ दिखाई दे रही थी।
अब गंगाजल की वापसी के बाद एक बार फिर घाटों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने लगी है। इससे धार्मिक गतिविधियों के साथ स्थानीय कारोबार को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।
7 नवंबर की मध्यरात्रि के बाद सामान्य प्रवाह की उम्मीद
गंगनहर की पूर्ण वार्षिक बंदी और मरम्मत का कार्यक्रम 7 नवंबर की मध्यरात्रि तक निर्धारित बताया गया है। इसके बाद 8 नवंबर से नहर में सामान्य जलप्रवाह बहाल होने की उम्मीद है। फिलहाल हरकी पैड़ी पर सीमित पानी की व्यवस्था श्रद्धालुओं को राहत देने के लिए की गई है।
ऐसे में दिवाली और गोवर्धन पूजा पर हरिद्वार जाने वाले श्रद्धालुओं को यह ध्यान रखना चाहिए कि अभी घाटों पर पानी की गहराई सामान्य से कम है। स्नान करते समय सावधानी बरतें और घाटों पर प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करें।
कुल मिलाकर दिवाली से पहले हरकी पैड़ी पर गंगाजल की वापसी ने श्रद्धालुओं को बड़ी राहत दी है। हालांकि, पूरी जलधारा लौटने में अभी समय लगेगा। अर्धकुंभ की तैयारियों और घाटों के निर्माण कार्यों के बीच फिलहाल सीमित पानी से ही श्रद्धालु गंगा स्नान और पूजा-अर्चना कर सकेंगे।
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