Masik Karthigai 2026: मासिक कार्तिगाई पर 1 दीप पलट देगा तकदीर, खास उपाय समेत जानें शुभ मुहूर्त
Masik Karthigai 2026:हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मासिक कार्तिगाई मनाई जाती है. दृक पंचांग के अनुसार, इस साल यह पर्व 23 फरवरी को मनाया जाएगा. भगवान मुरुगन यानी कार्तिकेय को समर्पित मासिक कार्तिगाई का पर्व मुख्य रूप से दक्षिण भारत में हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है. इसे दीपम कार्तिगाई के नाम से भी जाना जाता है. मान्यता है कि इस विशेष तिथि पर दीप प्रज्वलित करने से जीवन का अंधकार दूर होता है और साधक को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है. यही वजह है कि इस दिन लोग अपने घर में विशेष प्रकार का दीप जलाते हैं विधि-विधान से भगवान कार्तिकेय की पूजा-अर्चना करते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं मासिक कार्तिगाई के लिए शुभ मुहुर्त और इस दिन किन उपायों को करने से मुरुगन देवता की विशेष कृपा प्राप्त होगी|
मासिक कार्तिगाई 2026 शुभ मुहूर्त :
धार्मिक परंपरा के अनुसार, हर महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मासिक कार्तिगाई मनाई जाती है. हिंदू पंचांग के अनुसार, इस इस साल मासिक कार्तिगाई 23 फरवरी को मनाई जाएगी. इस दिन सूर्योदय 7 बजकर 11 मिनट पर होगा. जबकि, ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 32 मिनट से लेकर 6 बजकर 21 मिनट तक रहेगा|
दीप दान से होगा महाकल्याण:
इस पर्व की सबसे बड़ी विशेषता दीप है. शाम के समय भक्त अपने घरों, आंगन और गलियों को मिट्टी के दीयों से सजाते हैं. कई श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर भगवान मुरुगन के प्रति अपनी अटूट आस्था प्रकट करते हैं. मान्यता है कि इस दिन दीप दान करने से जन्म-जन्मांतर के पापों का नाश होता है|
मासिक कार्तिगाई 2026 पूजा विधि:
मासिक कार्तिगाई पर सुबह स्नान के बाद घर की अच्छी तरह साफ-सफाई करें और खुद स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इसके बाद पूजा घर में एक वेदी (चौकी) तैयार करें और वहां भगवान मुरुगन की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें. उन्हें फूलों की माला अर्पित करें. इस दिन आटे, गुड़ और घी के मिश्रण से बने दीयों का विशेष महत्व है. इन्हें तैयार कर जलाएं. भगवान शिव और कार्तिकेय जी को चंदन, हल्दी का लेप, धूप और नैवेद्य अर्पित करें. पूजन के अंत में भगवान मुरुगन की आरती करें और प्रसाद बांटें. इसके अलावा जब आप शाम के समय मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं, तो इन मंत्रों का उच्चारण करें|
मंत्र :
दीपज्योति: परब्रह्म: दीपज्योति: जनार्दन:, दीपोहरतिमे पापं संध्यादीपं नमोस्तुते
शुभं करोतु कल्याणमारोग्यं सुखं सम्पदां, शत्रुवृद्धि विनाशं च दीपज्योति: नमोस्तुति
इस पर्व के पीछे एक बहुत ही रोचक कथा है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी के बीच अपनी श्रेष्ठता को लेकर चर्चा हुई. तब भगवान शिव ने अपनी अनंत शक्ति को सिद्ध करने के लिए खुद को ज्योतिपुंज के रूप में प्रकट किया. भगवान शिव के उसी दिव्य प्रकाश स्वरूप की स्मृति में और भगवान कार्तिकेय की शक्ति के सम्मान में हर महीने कार्तिगाई दीपम मनाया जाता है|