March Ekadashi 2025: मार्च में कब है एकादशी जानिए तिथि और महत्व

Update: 2025-02-28 07:08 GMT
March Ekadashi 2025: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है, जो भगवान विष्णु को समर्पित होता है। हर महीने दो बार एकादशी व्रत का आयोजन किया जाता है, जिसमें विधिपूर्वक लक्ष्मी-नारायण की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, एकादशी व्रत रखने से पापों से मुक्ति मिलती है और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
जीवन में सुख-समृद्धि और इच्छित परिणाम प्राप्त करने के लिए एकादशी व्रत को विशेष रूप से लाभकारी माना गया है। मार्च का महीना जल्द ही शुरू होने वाला है। यदि आप भी श्रीहरि विष्णु की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं, तो आइए जानते हैं कि मार्च में एकादशी व्रत कब-कब मनाया जाएगा और इसका महत्व क्या है।
मार्च में कौन-कौन सी एकादशी आती है?
मार्च का पहला एकादशी व्रत फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर मनाया जाएगा, जिसे आमलकी एकादशी या रंगभरी एकादशी के नाम से जाना जाता है। वहीं, मार्च का दूसरा एकादशी व्रत चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर होगा, जिसे पापमोचिनी एकादशी कहा जाता है।
आमलकी एकादशी कब है?
वैदिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 9 मार्च को प्रातः 07:45 बजे से प्रारंभ होगी और इसका समापन 10 मार्च को प्रातः 7:44 बजे होगा। इस प्रकार, उदयातिथि के अनुसार, आमलकी एकादशी का व्रत 10 मार्च को रखा जाएगा।
आमलकी एकादशी व्रत का महत्व
आमलकी एकादशी का व्रत शास्त्रों में अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि इस दिन उपवास रखने से सौभाग्य, समृद्धि और खुशी की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि इस व्रत के माध्यम से सभी पापों का नाश होता है और भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। कहा जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु को आंवले का फल अर्पित करने से अच्छे स्वास्थ्य, धन और समृद्धि का वरदान मिलता है। इसलिए, जो लोग जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं, उन्हें इस दिन उपवास अवश्य करना चाहिए। साथ ही, व्रत के नियमों का पालन करते हुए पारण समय पर व्रत का पारण करना भी आवश्यक है।
मार्च में पापमोचिनी एकादशी कब ?
वैदिक पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 25 मार्च को प्रातः 5:05 बजे से शुरू होगी और इसका समापन 26 मार्च को तड़के 3:45 बजे होगा। इस प्रकार, उदयातिथि के अनुसार, पापमोचिनी एकादशी का व्रत 25 मार्च को रखा जाएगा।
पापमोचिनी एकादशी का महत्व :
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पापमोचिनी एकादशी का व्रत रखने से जन्म-जन्मांतर के पाप समाप्त हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि इस व्रत का पालन करने से सभी तीर्थ स्थलों के दर्शन करने और गायों का दान करने से भी अधिक पुण्य प्राप्त होता है।
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