Navratri 2026 Maa Skandamata Puja: हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष धार्मिक महत्व है। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। प्रत्येक दिन देवी के एक विशेष स्वरूप को समर्पित होता है। नवरात्रि का पांचवां दिन मां स्कंदमाता की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां स्कंदमाता की पूजा करने से भक्तों को सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। देवी का यह स्वरूप मातृत्व, प्रेम, करुणा और वात्सल्य का प्रतीक माना जाता है। विशेष रूप से संतान के सुख और परिवार की खुशहाली की कामना करने वाले भक्त मां स्कंदमाता की आराधना करते हैं।
मां स्कंदमाता को भगवान कार्तिकेय की माता के रूप में पूजा जाता है। भगवान कार्तिकेय को स्कंद और कुमार के नाम से भी जाना जाता है। इसी कारण माता पार्वती के इस स्वरूप को स्कंदमाता कहा जाता है। नवरात्रि के पांचवें दिन श्रद्धालु माता के मंदिरों में दर्शन करने पहुंचते हैं और अपने घरों में विधि-विधान से पूजा करते हैं।
कौन हैं मां स्कंदमाता?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान कार्तिकेय भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र हैं। भगवान कार्तिकेय को देवताओं का सेनापति भी कहा जाता है। माता पार्वती जब अपने पुत्र स्कंद को गोद में लेकर विराजमान होती हैं, तब उनके इस स्वरूप को स्कंदमाता कहा जाता है।
मां स्कंदमाता का स्वरूप अत्यंत शांत, सौम्य और करुणामयी माना जाता है। देवी की चार भुजाएं हैं। उनकी दो भुजाओं में कमल के पुष्प सुशोभित रहते हैं। एक हाथ से वह भगवान स्कंद को अपनी गोद में धारण करती हैं, जबकि दूसरे हाथ से भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
माता का वाहन सिंह है और उन्हें कमल के आसन पर विराजमान दिखाया जाता है। इसी कारण मां स्कंदमाता को पद्मासना देवी भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं में माता का यह स्वरूप शक्ति और मातृत्व के सुंदर संगम का प्रतीक है।
मां स्कंदमाता की पूजा का धार्मिक महत्व
नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि देवी की आराधना से भक्तों के जीवन में सकारात्मकता आती है और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
मां स्कंदमाता को विशेष रूप से संतान की रक्षा और कल्याण का आशीर्वाद देने वाली देवी माना जाता है। इसलिए संतान सुख की कामना करने वाले श्रद्धालु माता की पूजा करते हैं। जिन परिवारों में छोटे बच्चे हैं, वे भी बच्चों की सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करते हैं।
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, मां स्कंदमाता की उपासना से भक्तों को धैर्य, विवेक और आत्मविश्वास की प्रेरणा मिलती है। माता का शांत स्वरूप जीवन में प्रेम, सहनशीलता और करुणा बनाए रखने का संदेश देता है।
मां स्कंदमाता की पूजा विधि
नवरात्रि के पांचवें दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के पूजा स्थल की सफाई करें। माता दुर्गा और मां स्कंदमाता की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
पूजा स्थल पर दीपक जलाएं और देवी को पुष्प अर्पित करें। मां स्कंदमाता की पूजा में कमल के पुष्प का विशेष महत्व बताया गया है। यदि कमल उपलब्ध नहीं है, तो श्रद्धालु अन्य स्वच्छ और ताजे फूल भी अर्पित कर सकते हैं।
इसके बाद माता को अक्षत, रोली, कुमकुम और अन्य पूजा सामग्री चढ़ाएं। देवी को फल और मिठाई का भोग लगाएं। इस दौरान मां स्कंदमाता के मंत्रों का जाप करें और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करें।
पूजा के अंत में मां दुर्गा की आरती करें और सभी सदस्यों में प्रसाद वितरित करें। नवरात्रि में व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार उपवास भी रख सकते हैं।
मां स्कंदमाता को क्या भोग लगाएं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां स्कंदमाता को केले का भोग लगाना विशेष शुभ माना जाता है। नवरात्रि के पांचवें दिन श्रद्धालु माता को केले, मौसमी फल और मिठाइयां अर्पित कर सकते हैं। कई परिवारों में देवी को खीर और पीली मिठाइयों का प्रसाद चढ़ाने की भी परंपरा है।
मान्यता है कि माता को श्रद्धा और भक्तिभाव से भोग अर्पित करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। पूजा के बाद प्रसाद को परिवार के सदस्यों और जरूरतमंद लोगों में बांटना भी शुभ माना जाता है।
मां स्कंदमाता का मंत्र
नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप किया जा सकता है।
ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः।
श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार 11, 21 या 108 बार मंत्र का जाप कर सकते हैं। मान्यता है कि मंत्र जाप से मन एकाग्र होता है और भक्तों को आध्यात्मिक शांति का अनुभव होता है।
नवरात्रि 2026 में कब होगी पूजा?
शारदीय नवरात्रि 2026 की शुरुआत 11 अक्टूबर से हुई है। इस वर्ष पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा 15 अक्टूबर 2026, गुरुवार को की जाएगी। इस दिन भक्त देवी के पांचवें स्वरूप की आराधना करेंगे। स्थानीय पंचांग और धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा के समय में अंतर हो सकता है।
मां स्कंदमाता की आराधना भक्तों को मातृत्व, प्रेम और करुणा का महत्व समझाने वाली मानी जाती है। नवरात्रि के पांचवें दिन श्रद्धालु देवी से अपने परिवार की खुशहाली, संतान के कल्याण और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।