Gayatri Mantra से श्रीराम को मिला आत्मबल, जानिए गहरा संबंध

Update: 2025-06-06 07:34 GMT
Gayatri Mantra ज्योतिष न्यूज़: सनातन धर्म में गायत्री देवी और उनके मंत्र का विशेष महत्व है। मान्यता है कि गायत्री मंत्र में चारों वेदों का ज्ञान छिपा है। इस मंत्र के जाप से न सिर्फ मनोवांछित कामनाएं पूरी होती हैं बल्कि मोक्ष का मार्ग भी प्रशस्त होता है। गायत्री मंत्र का सीधा संबंध रामायण से है। आइए जानते हैं काशी के विद्वान और ज्योतिषाचार्य पंडित संजय उपाध्याय से गायत्री मंत्र की उत्पत्ति कैसे हुई।
पंडित संजय उपाध्याय ने बताया कि रामायण के सात अध्यायों में करीब 24000 श्लोक हैं। इन श्लोकों में आदर्श जीवन के साथ सभी रिश्तों के कर्तव्यों का वर्णन किया गया है। उन्होंने बताया कि गायत्री मंत्र में कुल 24 अक्षर हैं। ये सभी अक्षर रामायण के हर 1000 श्लोक के बाद आने वाले पहले अक्षर से लिए गए हैं और इस तरह गायत्री मंत्र 24 हजार श्लोकों के 24 अक्षरों से मिलकर बना है।
इसे जन्म देने वाली देवी माना जाता है
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गायत्री मंत्र को समझने से चारों वेदों का ज्ञान हो जाता है। आपको बता दें कि गायत्री देवी को चारों वेदों, शास्त्रों और श्रुतियों की देवी भी कहा जाता है।
भगवान ब्रह्मा से भी जुड़ी है कथा
रामायण के अलावा गायत्री मंत्र की उत्पत्ति की एक और कथा परमपिता ब्रह्मा जी से भी जुड़ी है। कथाओं के अनुसार सृष्टि के आरंभ में गायत्री मंत्र भगवान ब्रह्मा को प्रकट हुआ था। इसके बाद स्वयं भगवान ब्रह्मा ने इसे अपने मुख से उच्चारित किया। महर्षि विश्वामित्र ने अपनी कठोर तपस्या से इस चमत्कारी गायत्री मंत्र को जन-जन तक पहुंचाया।
यह है गायत्री मंत्र
‘ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्’
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