Religion Desk धर्म डेस्क : रत्नविज्ञान में मनुष्य की लगभग हर समस्या के लिए कोई न कोई रत्न निर्धारित किया जाता है। लेकिन रत्न धारण करने के कुछ नियम भी बताए गए हैं, जिनका पालन जरूर करना चाहिए, नहीं तो फायदे की जगह बुरे परिणाम मिल सकते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि आपको रत्न कब पहनना चाहिए और क्या नियम हैं?
रत्न धारण करने का महत्व
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार According to astrology प्रत्येक रत्न एक विशिष्ट ग्रह से सम्बंधित होता है। ऐसे में उस ग्रह का रत्न धारण करने का अर्थ है उस ग्रह को ऊर्जा देना। ऐसे में यदि ज्योतिष की सलाह के अनुसार रत्न धारण किया जाए तो ग्रह-नक्षत्रों आदि के दोषों से छुटकारा मिल सकता है। इसके अलावा नकारात्मक ऊर्जा भी दूर रहती है। सुखी वैवाहिक जीवन, नौकरी में उन्नति आदि के लिए भी लोग रत्न धारण करते हैं। इस रत्न को धारण करने से साधक जीवन की कई गंभीर समस्याओं से छुटकारा पा सकता है।
रत्न ज्योतिष के अनुसार रत्न हमेशा सुबह के समय ही धारण करना चाहिए न कि रात या शाम के समय, अन्यथा इसका शुभ परिणाम नहीं मिलेगा। इसके अलावा अमावस्या या सूर्य ग्रहण के दिन भी नया रत्न धारण करना वर्जित है।
एक बार रत्न धारण करने Once you wear a gemstone के बाद इसे बार-बार हटाया नहीं जा सकता अन्यथा इसका प्रभाव समाप्त हो जाता है। कभी भी टूटा हुआ रत्न नहीं पहनना चाहिए या ऐसा रत्न नहीं पहनना चाहिए जिसका मूल रंग बदल गया हो। यह भी याद रखें कि आप किसी दूसरे का रत्न न पहनें और न ही किसी और को अपना रत्न पहनने दें। रत्न धारण करते समय इस बात का ध्यान रखें कि रत्न आपकी त्वचा से छूना चाहिए, तभी आपको उसका लाभ मिल सकता है।