बटुक भैरव जयंती कब है? जानें पूजा तिथि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

बटुक भैरव जयंती की तैयारी शुरू

Update: 2026-06-28 04:23 GMT
Batuk Bhairav Jayanti 2026: भगवान बटुक भैरव, भगवान शिव का सौम्य एवं बाल स्वरूप हैं. हर वर्ष ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को बटुक भैरव जयंती मनाई जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी तिथि पर भगवान शिव ने संसार को विपत्तियों से बचाने के लिए पाँच वर्ष के बालक का रूप धारण किया था. मान्यता है कि जो भी भक्त इस दिन सच्चे मन से भगवान बटुक भैरव की आराधना करता है, उसके जीवन के दुख-कष्ट दूर होते हैं. साथ ही कुंडली में राहु-केतु के दोषों का प्रभाव कम होता है तथा सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है.
बटुक भैरव जयंती 2026: शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:04 बजे से 04:44 बजे तक (मंत्र दीक्षा और ध्यान के लिए सर्वोत्तम)
लाभ-उन्नति मुहूर्त: सुबह 05:25 बजे से 07:09 बजे तक
अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: सुबह 07:09 बजे से 08:54 बजे तक
शुभ-उत्तम मुहूर्त: सुबह 10:39 बजे से दोपहर 12:24 बजे तक
निशिता मुहूर्त (रात्रि पूजा): रात 12:04 बजे से 12:44 बजे तक (तंत्र, विशेष साधना और भैरव उपासना के लिए अत्यंत शुभ)
बटुक भैरव जयंती का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ‘आपद’ नामक एक भयंकर असुर का संहार करने तथा देवताओं को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाने के लिए भगवान शिव ने यह बाल स्वरूप धारण किया था. चूंकि यह भगवान शिव का सौम्य रूप माना जाता है, इसलिए गृहस्थ जीवन जीने वाले लोग भी इनकी पूजा अपने घर में सरलता से कर सकते हैं.
पूजा विधि
पूजा के दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इसके बाद व्रत एवं पूजा का संकल्प लें.
पूजा स्थान पर साफ लाल रंग का कपड़ा बिछाकर भगवान बटुक भैरव की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें.इसके बाद उन्हें लाल फूल, काले तिल, अक्षत तथा सरसों के तेल का दीपक अर्पित करें.
भगवान बटुक भैरव को खीर, पूरी, मीठी रोटी, हलवा और उबले हुए काले चने का भोग लगाएं.
इसके पश्चात बटुक भैरव मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें. मंत्र: “ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ॥”
अंत में भगवान बटुक भैरव की आरती करें और पूजा का समापन करें.
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