Kala Bhairava Ashtami ज्योतिष न्यूज़: भगवान शिव के रौद्र रूप को काल भैरव कहा जाता है। मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को काल भैरव की पूजा का विशेष महत्व है। इनकी पूजा से भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। भैरव नाथ अपने भक्तों पर शीघ्र कृपा करते हैं। इनकी पूजा अत्यंत फलदायी है। श्री भैरव की पूजा से व्यक्ति को सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा, इनकी पूजा से कर्ज, नकारात्मकता, शत्रु, मुकदमे, भय, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं आदि से शीघ्र मुक्ति मिलती है। आइए जानें कि नवंबर में काल भैरव अष्टमी कब है और इस दिन आपको कैसे पूजा करनी चाहिए।
काल भैरव अष्टमी कब है?
काल भैरव अष्टमी मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। वर्ष 2025 में यह तिथि 11 नवंबर को रात्रि 11:08 बजे से प्रारंभ होगी और अष्टमी तिथि 12 नवंबर को रात्रि 10:58 बजे समाप्त होगी। अतः उदयातिथि के अनुसार काल भैरव अष्टमी 12 नवंबर को मनाई जाएगी।
काल भैरव की पूजा कब की जाती है?
काल भैरव भगवान शिव का ही एक रूप हैं। इसलिए जिस प्रकार प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) में भगवान शिव की पूजा करना शुभ माना जाता है, उसी प्रकार आपको काल भैरव की भी पूजा करनी चाहिए। मध्यरात्रि में उनकी पूजा करना भी शुभ माना जाता है।
काल भैरव की पूजा कैसे करें?
सूर्यास्त के बाद भगवान काल भैरव की पूजा करना शुभ माना जाता है, लेकिन आपको सुबह व्रत का संकल्प अवश्य लेना चाहिए। सुबह जल्दी उठकर स्नान-ध्यान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल पर दीपक जलाकर व्रत का संकल्प लें। सूर्यास्त के बाद अपने घर के पूजा स्थल या भैरव मंदिर में चौमुखा दीपक जलाएँ। भैरव को जलेबी, पान, उड़द की दाल, नारियल आदि अर्पित करें। भगवान काल भैरव के मंत्रों का जाप करें और आरती करें। इस दिन काले कुत्ते की सेवा करना और उसे रोटी खिलाना भी शुभ माना जाता है। काल भैरव की पूजा के साथ-साथ ध्यान भी करना चाहिए।
काल भैरव को प्रसन्न करने के मंत्र:
ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं।
ॐ काल भैरवाय नमः।
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