31 अक्टूबर से सिंह राशि में गुरु का गोचर, अगले साल तक इसी राशि में आते-जाते रहेंगे बृहस्पति
guru gochar : ज्योतिष की दुनिया में गुरु यानी बृहस्पति को बेहद महत्वपूर्ण ग्रह माना जाता है। गुरु का राशि परिवर्तन ज्योतिषीय दृष्टि से खास घटनाक्रम माना जाता है, क्योंकि इसके साथ ग्रहों की चाल और उनके प्रभाव में बदलाव की चर्चा शुरू हो जाती है। अब 31 अक्टूबर को गुरु एक बार फिर राशि परिवर्तन करने जा रहे हैं। इस बार बृहस्पति का प्रवेश सिंह राशि में होगा, जिसे ग्रहों के राजा सूर्य की राशि माना जाता है। यही वजह है कि गुरु का यह गोचर ज्योतिषीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बताया जा रहा है कि मौजूदा समय में गुरु की गति सामान्य नहीं है। इस समय गुरु अतिचारी गति से चल रहे हैं। सामान्य तौर पर गुरु किसी एक राशि में अपेक्षाकृत लंबा समय बिताते हैं, लेकिन अतिचारी गति के दौरान उनकी चाल तेज हो जाती है और वे कम समय में एक राशि से दूसरी राशि में पहुंचते हैं। इसी कारण अभी गुरु एक राशि में लगभग तीन से चार महीने ही रह पा रहे हैं। ज्योतिष में इसी तेज गति को गुरु की अतिचारी स्पीड कहा जाता है।
अब 31 अक्टूबर से गुरु सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। सिंह राशि सूर्य की राशि है और सूर्य को ग्रहों का राजा कहा जाता है। ऐसे में गुरु का सूर्य की राशि में जाना अपने आप में एक उल्लेखनीय ज्योतिषीय परिवर्तन माना जा रहा है। इस गोचर को लेकर ज्योतिष में कई तरह की चर्चाएं होती हैं, क्योंकि गुरु को ज्ञान, विस्तार, शिक्षा, धर्म, मार्गदर्शन और सकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है, जबकि सिंह राशि को नेतृत्व, प्रतिष्ठा, आत्मविश्वास और प्रभाव से जोड़ा जाता है।
गुरु के इस गोचर की खास बात सिर्फ 31 अक्टूबर को होने वाला राशि परिवर्तन नहीं है। इसके बाद गुरु की चाल में फिर बदलाव आएगा। बताया जा रहा है कि 31 अक्टूबर के बाद गुरु वक्री अवस्था में जाएंगे और उसके बाद फिर मार्गी होंगे। यानी गुरु की स्थिति स्थिर नहीं रहने वाली है। उनकी चाल में बदलाव के कारण वे एक ही राशि में अलग-अलग चरणों में आगे-पीछे होते दिखाई देंगे।
इसी वजह से गुरु के सिंह राशि में रहने का पूरा घटनाक्रम थोड़ा लंबा हो जाएगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार गुरु अगले साल तक सिंह राशि में आते-जाते रहेंगे। इसका मतलब यह है कि 31 अक्टूबर का गोचर एक सीधा और अंतिम पड़ाव नहीं होगा। गुरु की वक्री और फिर मार्गी चाल के कारण उनकी स्थिति में परिवर्तन जारी रहेगा और इसका ज्योतिषीय अध्ययन अलग-अलग चरणों में किया जाएगा।
गौर करने वाली बात यह भी है कि गुरु वास्तव में कन्या राशि में अगले साल ही जा पाएंगे। यानी सिंह राशि में उनका यह सफर तुरंत समाप्त नहीं होने वाला है। गुरु की चाल और वक्री-मार्गी स्थिति के कारण सिंह राशि से कन्या राशि की ओर उनका स्थायी प्रवेश अगले वर्ष होने की बात कही जा रही है। ऐसे में गुरु के गोचर का प्रभाव देखने वाले लोगों के लिए आने वाला समय काफी महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
ज्योतिष शास्त्र में गुरु की भूमिका को विशेष माना जाता है। गुरु को देवगुरु बृहस्पति के रूप में देखा जाता है और उन्हें ज्ञान, शिक्षा, संतान, विवाह, धार्मिक कार्य, भाग्य और विस्तार का कारक माना जाता है। यही कारण है कि जब गुरु राशि परिवर्तन करते हैं तो ज्योतिष में इसे लेकर व्यापक चर्चा होती है। हालांकि किसी भी गोचर का प्रभाव सभी लोगों पर एक जैसा नहीं माना जाता। व्यक्ति की जन्म कुंडली, लग्न, चंद्र राशि और ग्रहों की स्थिति के आधार पर परिणामों में अंतर बताया जाता है।
31 अक्टूबर का गुरु गोचर इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यह सूर्य की राशि सिंह में होने जा रहा है और इसके बाद गुरु की वक्री तथा मार्गी चाल भी देखने को मिलेगी। यानी आने वाले महीनों में गुरु की स्थिति कई बार बदल सकती है। इस पूरे दौर में सिंह राशि में गुरु की मौजूदगी और फिर उनकी चाल के बदलाव को ज्योतिषीय नजरिए से महत्वपूर्ण माना जाएगा।
कुल मिलाकर 31 अक्टूबर से गुरु का सिंह राशि में प्रवेश एक अहम ज्योतिषीय घटना के रूप में देखा जा रहा है। गुरु की अतिचारी गति, इसके बाद वक्री और मार्गी अवस्था तथा अगले साल तक सिंह राशि में उनका आते-जाते रहना इस गोचर को और खास बनाता है। वहीं कन्या राशि में गुरु का स्थायी प्रवेश अगले साल होने की बात कही जा रही है। आने वाले समय में गुरु की चाल में होने वाले इन बदलावों को लेकर ज्योतिष प्रेमियों और जानकारों की नजर बनी रहेगी।