Holika Dahan ज्योतिष न्यूज़ : हिंदू पंचांग का आखिरी महीना यानी फाल्गुन आरंभ हो चुका है और इस महीने में कई बड़े त्योहार मनाए जाते हैं जिसमें होली भी प्रमुख है। होली का त्योहार रंगों का पर्व माना गया है इस शुभ दिन पर लोग एक दूसरे को रंग लगाकर शुभकामनाएं देते हैं। इस साल होली का त्योहार 14 मार्च को मनाया जाएगा।
होली से एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है जो कि इस बार 13 मार्च को पड़ रही है। होलिका दहन पर इस बार भद्रा का साया रहेगा जिसके कारण होली दहन के लिए कुल 1 घंटे का समय भक्तों को प्राप्त हो रहा है। होलिका दहन पूजा को बेहद ही जरूरी माना गया है, ऐसे में हम आपको बता रहे हैं कि होलिका दहन क्यों जरूरी है और इसके पीछे की पौराणिक कथा क्या है, तो आइए जानते हैं।
होलिका दहन पौराणिक कथा—
होलिका दहन की कथा भगवान विष्णु के भक्त प्रह्लाद से जुड़ी मानी जाती है. पौराणिक कथा के अनुसार, प्रह्लाद के पिता राक्षसराज हिरण्यकश्यप था, जो कि भगवान विष्णु का सबसे बड़ा शत्रु माना जाता था और वह खुद को भगवान मानता था. उसने अपने राज्य में सबको यह आदेश किया था कि कोई भी ईश्वर की पूजा नहीं करेगा.
लेकिन उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था. जब हिरण्यकशिपु ने अपने पुत्र को भगवान की पूजा करते हुए देखा तो उसने अपने ही पुत्र को दंड देने की ठान ली. हिरण्यकशिपु ने प्रह्लाद को कई बार कष्ट देना चाहा, लेकिन भगवान विष्णु ने हमेशा प्रह्लाद का साथ दिया.
अंत में अत्याचारी राजा हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका से मदद मांगी. होलिका को यह वरदान प्राप्त था कि उसे अग्नि नहीं जला सकती है, इसलिए होलिका प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई. लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से होलिका उस अग्नि में भस्म हो गई और प्रह्लाद बच गया. तब से होलिका दहन का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है. होलिका दहन के अगले दिन रंगों का त्योहार होली मनाया जाता है.