देवघर: झारखंड के देवघर में स्थित बाबा वैद्यनाथ धाम हिंदू धर्म के प्रमुख तीर्थ स्थलों में शामिल है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसे भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। इस धाम की एक और विशेषता यह है कि यहां ज्योतिर्लिंग के साथ माता सती का शक्तिपीठ भी माना जाता है। इसी कारण वैद्यनाथ धाम को शिव और शक्ति के संगम के रूप में विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है।
वैद्यनाथ मंदिर परिसर में बाबा भोलेनाथ के दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। सावन के महीने में यहां आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है। लाखों कांवड़िये सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर लंबी यात्रा तय करते हुए देवघर पहुंचते हैं और बाबा वैद्यनाथ का जलाभिषेक करते हैं।
पौराणिक मान्यता के अनुसार वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग की कथा लंकापति रावण से जुड़ी है। कहा जाता है कि रावण भगवान शिव का परम भक्त था और उसने कठोर तपस्या कर भगवान शिव को प्रसन्न किया था। वह शिवलिंग को अपने साथ लंका ले जाना चाहता था, लेकिन परिस्थितियों के कारण शिवलिंग वर्तमान देवघर क्षेत्र में स्थापित हो गया। इसके बाद से यह स्थान भगवान शिव की आराधना का प्रमुख केंद्र माना जाने लगा। वैद्यनाथ धाम को शक्तिपीठ के रूप में भी पूजा जाता है। मान्यता है कि भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के अलग-अलग अंग पृथ्वी पर जिन स्थानों पर गिरे, वहां शक्तिपीठ स्थापित हुए। देवघर में माता सती का हृदय गिरने की मान्यता है। यहां माता को जय दुर्गा के स्वरूप में पूजा जाता है।
मंदिर परिसर में भगवान शिव और माता पार्वती के मंदिरों के शिखरों को पवित्र धागे से जोड़ने की परंपरा भी प्रचलित है। श्रद्धालुओं के लिए यह शिव और शक्ति की एकता का प्रतीक है। यही विशेषता वैद्यनाथ धाम को दूसरे कई शिव तीर्थों से अलग पहचान देती है। सावन के दौरान बाबा धाम की यात्रा का विशेष महत्व माना जाता है। बिहार के भागलपुर जिले में स्थित सुल्तानगंज से श्रद्धालु उत्तरवाहिनी गंगा का जल भरते हैं और करीब 100 किलोमीटर से अधिक की कांवड़ यात्रा पूरी कर देवघर पहुंचते हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु पैदल ही यह यात्रा करते हैं और बाबा को गंगाजल अर्पित करते हैं।
धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक बाबा वैद्यनाथ की पूजा और जलाभिषेक करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। भगवान शिव के वैद्यनाथ स्वरूप को रोगों और कष्टों से मुक्ति प्रदान करने वाला भी माना जाता है। यही कारण है कि यहां वर्षभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। सावन और महाशिवरात्रि जैसे विशेष अवसरों पर वैद्यनाथ धाम में श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है। प्रशासन की ओर से भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा, चिकित्सा और पेयजल जैसी व्यवस्थाएं की जाती हैं।
बाबा वैद्यनाथ धाम केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि सदियों से चली आ रही शिव भक्ति और शक्ति उपासना का महत्वपूर्ण केंद्र है। ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ की मान्यताओं का एक ही स्थान से जुड़ना इसे श्रद्धालुओं के लिए बेहद खास बनाता है।
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