Hartalika Teej Vrat Katha 2025: हरतालिका तीज पर पढ़ें ये व्रत कथा

Update: 2025-08-23 03:21 GMT
Hartalika Teej Vrat Katha 2025: हरतालिका तीज का पर्व भारतीय संस्कृति में सुहागिनों के लिए एक अत्यंत पवित्र और श्रद्धा से भरा दिन होता है। यह पर्व भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। यह दिन न केवल व्रत और पूजा-पाठ का होता है बल्कि यह उस पावन प्रेम और समर्पण की स्मृति भी है जो माता पार्वती ने भगवान शिव के लिए दिखाया था। माना जाता है कि इस दिन सच्चे मन से की गई पूजा और व्रत से जीवनसाथी संग प्रेम, विश्वास और सौहार्द का रिश्ता और भी गहरा होता है। हरतालिका तीज के दिन कथा का पाठ करने से आपके जीवन की परेशानियां दूर ही जाती हैं और पति के साथ प्रेम-प्यार बना रहता है।
प्राचीन काल में देवी पार्वती ने भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने की गहरी इच्छा से कठोर तपस्या की थी। मान्यता है कि उन्होंने हज़ारों वर्षों तक केवल बेलपत्र खाकर घोर तप किया। तप की अग्नि में तपकर उन्होंने अपनी भक्ति और समर्पण का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया, जिससे अंततः भगवान शिव प्रसन्न हो गए। पार्वती जी की निष्ठा और प्रेम को स्वीकार करते हुए शिव जी ने उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया।
इस दिव्य मिलन के बाद दोनों का विवाह विधि-पूर्वक संपन्न हुआ और वे कैलाश पर्वत पर साथ रहने लगे लेकिन विवाह के बाद भगवान शिव ने माता पार्वती को बताया कि सृष्टि के कल्याण हेतु उन्हें कई बार अलग होना पड़ेगा और उन्हें विभिन्न रूपों में पृथ्वी पर जन्म लेना पड़ेगा।
यह सुनकर माता पार्वती ने निश्चय किया कि वे हर जन्म में केवल शिव जी को ही अपने पति के रूप में प्राप्त करेंगी। इसी संकल्प के साथ उन्होंने एक विशेष व्रत की शुरुआत की, जिसे उन्होंने भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा। यह वही तिथि है जिसे आज हम हरतालिका तीज के नाम से जानते हैं।
ऐसी मान्यता है कि इस दिन जो भी सुहागन स्त्रियाँ पूरे श्रद्धा भाव से व्रत रखती हैं और शिव-पार्वती की पूजा करती हैं, उनके वैवाहिक जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य बना रहता है। यह व्रत पति-पत्नी के रिश्ते को मजबूती प्रदान करता है और जीवनभर प्रेम व विश्वास को कायम रखता है।
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