Halshashthi हलषष्ठी: हल छठ 14 अगस्त, गुरुवार को है। इस अवसर पर माताएँ अपनी संतान की सुरक्षा और सुखी जीवन के लिए व्रत रखती हैं। इस व्रत में माताएँ प्रथम पूज्य गणेश, माता पार्वती, छठी मैया और बलराम जी की पूजा करती हैं। भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम जी का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को हुआ था। उनका शस्त्र हल है, जिसके कारण इस तिथि को हल षष्ठी के नाम से जाना जाता है। जो माताएँ पहली बार हल षष्ठी का व्रत रखने जा रही हैं, उन्हें कुछ नियमों का ध्यान रखना चाहिए क्योंकि कुछ गलतियों के कारण उनका व्रत खंडित हो सकता है। इससे उन्हें व्रत का पूरा फल नहीं मिल पाएगा। आइए महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय, उज्जैन के ज्योतिषाचार्य डॉ. मृत्युंजय तिवारी से जानते हैं कि हल षष्ठी के दिन कौन से कार्य नहीं करने चाहिए।
हल षष्ठी के दिन न करें ये 6 काम:
1. हल षष्ठी जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, यह हल और षष्ठी तिथि का मेल है। इस व्रत में उन चीजों का प्रयोग नहीं किया जाता जो हल से जोती गई हों।
2. हल षष्ठी के व्रत में गाय का दूध और उससे बनी चीजें जैसे दही, घी आदि का प्रयोग नहीं किया जाता।
3. इस व्रत में माताओं को महुआ के पेड़ की दातुन करनी चाहिए। अन्य दातुन का प्रयोग वर्जित है।
4. हल षष्ठी का व्रत रखने वाली महिलाओं को हल से जोती हुई भूमि पर चलने की मनाही होती है।
5. व्रत के दिन और उससे एक दिन पहले भी व्रत रखने वाली महिलाओं को लहसुन, प्याज, मांस आदि तामसिक चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।
6. यदि आप अपनी संतान के सुखी जीवन के लिए यह व्रत रख रही हैं, तो आपको अपनी संतान को किसी भी प्रकार का कष्ट नहीं देना चाहिए। इसी प्रकार, संतान को भी अपनी माता को कष्ट नहीं देना चाहिए।
हल षष्ठी के दिन महिलाओं को क्या खाना चाहिए:
इस व्रत में महिलाओं को खाने में सिंघाड़े या महुआ के आटे का प्रयोग करना चाहिए। आप तिन्नी चावल, भैंस का दूध, दही, घी, फल आदि का उपयोग कर सकते हैं। जुताई से उत्पन्न उत्पादों का उपयोग करें।
हल षष्ठी मुहूर्त:
भाद्रपद कृष्ण षष्ठी तिथि प्रारम्भ: 14 अगस्त, गुरुवार, प्रातः 4 बजकर 23 मिनट से
भाद्रपद कृष्ण षष्ठी तिथि समाप्त: 15 अगस्त, शुक्रवार, प्रातः 2:07 बजे।
सर्वार्थ सिद्धि योग: संपूर्ण दिन
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:59 बजे से दोपहर 12:52 बजे तक।