Govatsa Dwadashi 2025: कब है गोवत्स द्वादशी व्रत, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और नियम

Update: 2025-10-15 07:22 GMT
Govatsa Dwadashi 2025: गोवत्स द्वादशी को अत्यंत पवित्र दिन माना जाता है। यह गाय और उसके बछड़े के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन है। गोवत्स द्वादशी को महाराष्ट्र में वसु बारस और गुजरात में वाघ बारस के नाम से जाना जाता है। इसे बछ बारस, नंदिनी व्रत या वत्स द्वादशी भी कहा जाता है। इस दिन गाय और बछड़े की पूजा की जाती है। इसके अलावा, गाय के दूध से बने उत्पादों का सेवन नहीं किया जाता है।
धनतेरस से एक दिन पहले गोवत्स द्वादशी मनाई जाती है। इस दिन महिलाएं अपनी संतान की लंबी आयु, परिवार में समृद्धि और शांति के लिए व्रत रखती हैं। तो आइए जानें कि इस साल गोवत्स द्वादशी कब है? इसका शुभ मुहूर्त क्या है? व्रत के नियम क्या हैं?
गोवत्स द्वादशी कब है?
गोवत्स द्वादशी हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की द्वादशी को मनाई जाती है। पंचांग के अनुसार, इस वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि शुक्रवार, 17 अक्टूबर 2025 को प्रातः 11:12 बजे प्रारंभ होगी। यह तिथि अगले दिन, शनिवार, 18 अक्टूबर 2025 को दोपहर 12:18 बजे समाप्त होगी। अतः गोवत्स द्वादशी 17 अक्टूबर को मनाई जाएगी।
गोवत्स द्वादशी पूजा मुहूर्त:
गोवत्स द्वादशी के दिन प्रदोष काल में पूजा करना सर्वोत्तम माना जाता है। इस दिन प्रदोष काल (गोवत्स द्वादशी मुहूर्त) शाम 5:49 बजे से रात्रि 8:20 बजे तक रहेगा। इससे गोवत्स द्वादशी पूजा के लिए लगभग ढाई घंटे का समय मिलता है।
गोवत्स द्वादशी पूजा विधि:
गोवत्स द्वादशी के दिन प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए।
इसके बाद गौ माता और उनके बछड़े की पूजा का संकल्प लेना चाहिए।
इसके बाद गाय और उसके बछड़े को स्नान कराना चाहिए।
उनके सींगों को सजाकर उन पर मालाएँ पहनानी चाहिए।
गाय और उसके बछड़े को रोली और चंदन का तिलक लगाना चाहिए।
धूप-दीप जलाकर गाय और उसके बछड़े की भक्तिपूर्वक पूजा करनी चाहिए।
फिर आटे के गोले पर गुड़ लगाकर गाय को खिलाना चाहिए।
दीपक जलाकर गाय की आरती करनी चाहिए।
गोवत्स द्वादशी की कथा सुननी चाहिए।
अगले दिन त्रयोदशी तिथि को गाय की पूजा के बाद व्रत तोड़ना चाहिए।
गोवत्स द्वादशी के दिन गेहूँ, चावल या गाय के दूध से बने उत्पादों का सेवन नहीं करना चाहिए। भैंस का दूध, फल या सादा भोजन ग्रहण किया जा सकता है। चाकू या किसी नुकीली वस्तु का प्रयोग नहीं करना चाहिए। तामसिक पदार्थों का सेवन वर्जित है।
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