Ganpati Bappa: गणेश चतुर्थी से विसर्जन तक भक्त नित्य पूजा-अर्चना करते हैं। इस दौरान पौधों का भी विशेष महत्व होता है। भगवान गणेश को आक का पौधा बहुत प्रिय है। मान्यता है कि आक के पत्तों और फूलों से गणेशजी की पूजा करने से वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। आक को न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि आयुर्वेदिक दृष्टि से भी अत्यंत लाभकारी माना जाता है। प्रतिदिन आक अर्पित करने से मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और कार्यों में सफलता मिलती है।
गणेश चतुर्थी से विसर्जन तक भक्त नित्य पूजा-अर्चना करते हैं। इस दौरान पौधों का भी विशेष महत्व होता है। भगवान गणेश को आक का पौधा बहुत प्रिय है। मान्यता है कि आक के पत्तों और फूलों से गणेशजी की पूजा करने से वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
आक के पौधे की विशेषता यह है कि कई स्थानों पर इसकी जड़ को भगवान गणेश के रूप में पूजा जाता है। इसे गणपति जड़ भी कहा जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में गणेश जी की मूर्ति आक की जड़ से बनाई जाती है और इसे घर में स्थापित कर विधिपूर्वक पूजन करने से अपार सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
गणेश जी को दूर्वा (घास) भी बहुत प्रिय है, जो उनके सभी अनुष्ठानों में अनिवार्य रूप से चढ़ाई जाती है। लेकिन विशेष अवसरों पर आक के पौधे का विशेष महत्व होता है। आक के पत्तों की माला बनाकर गणेश जी को अर्पित करने से सभी विघ्न दूर होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, आक का पौधा भगवान गणेश की तरह ही औषधीय और शुभ फलदायी होता है। यह पौधा कठिन परिस्थितियों में भी जीवित रहता है, ठीक उसी तरह जैसे गणेश जी अपने भक्तों के सभी कष्टों को सहन करते हैं और उन्हें सुरक्षित रखते हैं।
गणेश जी को आक के फूल चढ़ाने का विशेष महत्व बताया गया है। पंडित दीपक शर्मा ने बताया कि भगवान गणेश को आक के फूल चढ़ाने से मानसिक शांति मिलती है और धन-संपत्ति में वृद्धि होती है। आक के सफेद या बैंगनी फूल चढ़ाने से घर से नकारात्मकता दूर होती है और भक्त को जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिलती है।