Religion Spirituality,धर्म अध्यात्म: इस साल का धनतेरस पर्व शनिवार, 18 अक्टूबर 2025 को मनाया जा रहा है। पंचांग के अनुसार, यह कार्तिक मास कृष्ण‑पक्ष की त्रयोदशी तिथि है।
तिथि एवं मुहूर्त
त्रयोदशी तिथि का आरंभ : 18 अक्टूबर 2025, 12:18 PM से।
त्रयोदशी का समापन : 19 अक्टूबर 2025, 1:51 PM तक।
पूजा का मुख्य मुहूर्त : शाम के समय लगभग 7:16 PM से 8:20 PM तक (शहर‑अनुसार मामूली बदलाव के साथ)।
प्रदोष काल : शाम 5:48 PM से 8:20 PM।
उदाहरण के तौर पर:
दिल्ली‑एनसीआर में मुहूर्त : 7:16 PM – 8:20 PM
मुंबई में मुहूर्त : 7:49 PM – 8:41 PM
क्या करें इस दिन?
धनतेरस पर घर की सफाई‑सजावट, पूजा‑व्यवस्था, नए सामान की खरीदारी और विशेष रूप से सोना‑चांदी, बर्तन, उपकरण आदि लेने की परंपरा है।
पूजा में प्रमुख रूप से माता लक्ष्मी, कुबेर और धन्वंतरि का समर्पण किया जाता है—धन, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना होती है।
तकनीकी‑विवरण
कारण : ‘धन’ का अर्थ धन‑संपदा से तथा ‘तेरस’ से तात्पर्य त्रयोदशी तिथि से होता है।
क्यों शुभ : यह वक्त माना जाता है जब ग्रह‑नक्षत्र तथा तिथि‑योग धन‑प्राप्ति के अनुकूल होते हैं। उदाहरण‑स्वरूप, इस वर्ष बृहस्पति देव (गुरु) की स्थिति और वृषभ लग्न को लाभदायक माना जा रहा है।
बाज़ारों की हलचल
धनतेरस के पूर्वसंकेत के रूप में बाजारों में क्रय‑क्रिया शुरू हो चुकी है। विशेष रूप से सोना और चांदी की कीमतें उच्च स्तर पर पहुँच गई हैं—उदाहरण के तौर पर मुंबई में 10 ग्राम सोने का भाव ₹1,30,000 पार गया है।
उपभोक्ताओं को सलाह दी जा रही है कि मुहूर्त के वक़्त खरीदारी करें तथा मन‑स्थिति, बजट और जरूरत के अनुरूप निर्णय लें।
किस समय तक सावधान रहें?
चूंकि तिथि शाम से शुरू होकर अगले दिन दोपहर तक रहेगी, इसलिए शाम का मुहूर्त विशेष रूप से प्रभावी माना जाता है। इस लिहाज से –
खरीदारी व पूजा : 18 अक्टूबर शाम लगभग 7 PM से शुरू हुई।
तिथि समाप्ति : 19 अक्टूबर दोपहर 1 : 51 PM तक।
इसके बाद तिथि बिलकुल न भूलें, पर मुख्य शुभ समय पहले ही आता है।
धनतेरस 2025 का पर्व इस बार 18 अक्टूबर को मनाया जाएगा। त्रयोदशी तिथि 12:18 PM से आरंभ होगी और 19 अक्टूबर 1:51 PM तक जारी रहेगी। हालांकि पूजा‑क्रिया और खरीदारी के लिए शाम 7:16 PM से 8:20 PM का मुहूर्त किफ़ायती माना गया है। योजना बनाकर इस समय का सदुपयोग करना श्रेयस्कर होगा। घरेलू सजावट, पूजा‑विधि और क्रय‑वस्तु चयन को इस शुभ काल के अनुरूप तैयार कर समृद्धि के संकेत को मजबूत किया जा सकता है।