धर्म डेस्क: मां दुर्गा की उपासना में दुर्गा सप्तशती के पाठ का विशेष महत्व माना गया है। देवी माहात्म्य या चंडी पाठ के नाम से प्रसिद्ध दुर्गा सप्तशती में 13 अध्याय और 700 श्लोक माने जाते हैं। खासकर नवरात्रि के दौरान श्रद्धालु मां भगवती की कृपा पाने के लिए इसका पाठ करते हैं। लेकिन भक्तों के मन में अक्सर सवाल रहता है कि दुर्गा सप्तशती का पाठ दिन में करना अधिक शुभ है या रात में?
धार्मिक परंपराओं के अनुसार दुर्गा सप्तशती का पाठ सुबह और रात दोनों समय किया जा सकता है। पाठ-विधि के एक प्रचलित संस्करण में भी चंडी पाठ को रात-दिन करने का उल्लेख मिलता है। इसलिए ऐसा कोई सामान्य नियम नहीं है कि इसका पाठ केवल दिन में या केवल रात में ही किया जाए।
रात का समय क्यों माना जाता है विशेष?
कुछ धार्मिक मान्यताओं में दुर्गा सप्तशती के रात्रि पाठ को विशेष फलदायी बताया गया है। इसके पीछे एक व्यावहारिक कारण यह भी माना जाता है कि रात में वातावरण अपेक्षाकृत शांत रहता है। आसपास शोर और दूसरे काम कम होने से साधक पाठ पर बेहतर तरीके से ध्यान केंद्रित कर सकता है।
देवी दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप और रात्रि उपासना की परंपरा के कारण भी कई साधक रात के समय पाठ करना पसंद करते हैं। हालांकि इसे सभी के लिए अनिवार्य नियम नहीं माना जाना चाहिए।
सुबह पाठ करना भी माना गया है शुभ
अगर रात में पाठ करना संभव नहीं है तो सुबह स्नान के बाद शांत मन से दुर्गा सप्तशती पढ़ी जा सकती है। कई धार्मिक परंपराओं में सुबह या शाम का ऐसा समय चुनने की सलाह दी जाती है, जब मन शांत हो और पाठ को बिना बाधा पूरा किया जा सके।
इसलिए गृहस्थ व्यक्ति अपनी दिनचर्या के अनुसार सुबह का समय भी चुन सकता है। महत्वपूर्ण बात समय से ज्यादा नियमितता, श्रद्धा और एकाग्रता को माना गया है।
पाठ से पहले इन नियमों का रखें ध्यान
दुर्गा सप्तशती की पारंपरिक पाठ-विधि के अनुसार साधक को स्नान करके स्वच्छ होना चाहिए। इसके बाद शुद्ध आसन पर बैठकर सामने दुर्गा सप्तशती की पुस्तक को स्वच्छ स्थान पर रखना चाहिए। संकल्प के साथ पाठ शुरू करने की परंपरा है। इसके क्रम में कवच, अर्गला और कीलक समेत अन्य अंगों का भी विधान मिलता है।
अगर रात में पाठ कर रहे हैं तो भी स्वच्छता और एकाग्रता का ध्यान रखना चाहिए। जल्दबाजी में श्लोक पढ़ने के बजाय स्पष्ट उच्चारण और शांत मन के साथ पाठ करने की सलाह दी जाती है।
नवरात्रि में बढ़ जाता है महत्व
शारदीय और चैत्र नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ विशेष रूप से लोकप्रिय है। भक्त नौ दिनों में अलग-अलग अध्यायों का पाठ करते हैं या अपनी परंपरा के अनुसार संपूर्ण पाठ का अनुष्ठान करते हैं।
तो दिन या रात में कब करें पाठ?
सामान्य पूजा के लिए सुबह का शांत समय उपयुक्त माना जा सकता है, जबकि देवी की विशेष रात्रि उपासना करने वाले साधक रात में पाठ कर सकते हैं। कुछ परंपराओं में रात्रि पाठ को विशेष महत्व दिया गया है, लेकिन यह कहना उचित नहीं होगा कि दिन में किया गया पाठ फलदायी नहीं होता।
आखिरकार दुर्गा सप्तशती के पाठ में समय के साथ श्रद्धा, शुद्धता, सही विधि और एकाग्रता को महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेष अनुष्ठान या तांत्रिक साधना के लिए योग्य गुरु या आचार्य से विधि समझकर ही आगे बढ़ना बेहतर है।
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