गणेश विसर्जन के पीछे क्या है पौराणिक कथा जानें धार्मिक महत्व और शुभ मुहूर्त
गणपति विसर्जन का वेद व्यास से क्या है संबंध
धर्म डेस्क: गणेश चतुर्थी के साथ घरों और पंडालों में गणपति बप्पा का आगमन होता है। कई दिनों तक पूजा-अर्चना के बाद भक्त भावुक मन से भगवान गणेश की प्रतिमा का विसर्जन करते हैं। इस दौरान ‘गणपति बप्पा मोरया अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयकारे सुनाई देते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि गणेश प्रतिमा को आखिर जल में विसर्जित क्यों किया जाता है? इसके पीछे धार्मिक मान्यताओं के साथ महर्षि वेद व्यास और महाभारत से जुड़ी एक लोकप्रिय पौराणिक कथा भी प्रचलित है।
2026 में गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर सोमवार से शुरू होगा। मुख्य गणेश विसर्जन 25 सितंबर शुक्रवार को अनंत चतुर्दशी पर किया जाएगा।
वेद व्यास और गणेश जी की पौराणिक कथा
लोकप्रिय पौराणिक मान्यता के अनुसार महर्षि वेद व्यास ने जब महाभारत की रचना करने का निर्णय लिया तो उन्हें इसे लिखने के लिए ऐसे व्यक्ति की जरूरत थी जो उनके विचारों को तेजी से लिख सके। उन्होंने भगवान गणेश से महाभारत लिखने का अनुरोध किया।
गणेश जी इसके लिए तैयार हो गए लेकिन उन्होंने एक शर्त रखी कि वेद व्यास कथा सुनाते समय बीच में नहीं रुकेंगे। व्यास जी ने भी शर्त रखी कि गणेश जी प्रत्येक श्लोक का अर्थ समझने के बाद ही उसे लिखेंगे।
मान्यता है कि इसके बाद वेद व्यास कथा सुनाते रहे और भगवान गणेश लगातार उसे लिखते रहे। दस दिनों तक बिना विश्राम लेखन करने के कारण गणेश जी के शरीर का तापमान काफी बढ़ गया।
तब वेद व्यास जी ने गणेश जी को शीतल करने के लिए सरोवर के जल से स्नान कराया। यह दिन अनंत चतुर्दशी का बताया जाता है। इसी प्रसंग से दस दिनों के गणेशोत्सव के बाद प्रतिमा के जल विसर्जन की परंपरा को जोड़ा जाता है। ध्यान रहे कि यह धार्मिक लोकमान्यता है, ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित घटना नहीं।
विसर्जन का आध्यात्मिक अर्थ
गणेश विसर्जन का एक गहरा प्रतीकात्मक अर्थ भी माना जाता है। मिट्टी से तैयार गणेश प्रतिमा की स्थापना और पूजा करने के बाद उसे फिर जल में मिला दिया जाता है। इसे प्रकृति के चक्र और भौतिक स्वरूप की नश्वरता का प्रतीक माना जाता है—जो प्रकृति से आया है वह अंततः प्रकृति में ही विलीन हो जाता है।
भक्तों की मान्यता है कि विसर्जन के साथ गणपति अपने धाम लौटते हैं और अगले वर्ष फिर भक्तों के घर आने का आशीर्वाद देकर जाते हैं।
गणेश विसर्जन 2026 का शुभ मुहूर्त
2026 में अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर को है। चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर रात 11:18 बजे से शुरू होकर 25 सितंबर रात 11:06 बजे तक रहने की सूचना है।
गणेश विसर्जन के लिए सुबह 6:28 से 10:59 बजे और दोपहर 12:30 से 2:01 बजे तक शुभ समय बताया गया है। स्थान के अनुसार पंचांग के समय में थोड़ा अंतर हो सकता है।
वैसे गणपति का विसर्जन केवल अनंत चतुर्दशी पर ही नहीं होता। पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार भक्त डेढ़ दिन, तीसरे, पांचवें या सातवें दिन भी बप्पा का विसर्जन करते हैं। इस प्रकार गणेश विसर्जन केवल गणेशोत्सव की विदाई नहीं बल्कि आगमन और प्रस्थान, सृजन और विलय तथा जीवन की निरंतरता का धार्मिक प्रतीक भी माना जाता है।