Bhishma Ashtami 2026: पितृ पूजा का विशेष दिन 26 जनवरी को

Update: 2026-01-17 14:37 GMT
Religion Spirituality, धर्म अध्यात्म: पंचांग के अनुसार हर साल माघ माह की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को भीष्म अष्टमी मनाई जाती है। इस दिन महाभारत के पौराणिक वर्णन के अनुसार भीष्म पितामह ने अपने प्राण त्यागे थे। इस बार भीष्म अष्टमी सोमवार, 26 जनवरी 2026 को पड़ रही है।
भीष्म अष्टमी को पितृ पूजा और श्राद्ध कर्म के रूप में विशेष महत्व प्राप्त है। इसे करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है, वहीं जीवन में जातक को पितरों का आशीर्वाद मिलता है। इस दिन विशेष रूप से पितृ निवारण स्तोत्र और पितृ कवच का पाठ करने का महत्व है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भीष्म पितामह ने अपने जीवन में धर्म और कर्तव्य की सर्वोच्च मिसाल पेश की थी। उन्होंने महाभारत युद्ध में सत्य और धर्म के मार्ग का पालन करते हुए अष्टमी तिथि को अपने प्राण त्यागे। इसी कारण से यह दिन पितृ तर्पण और श्राद्ध के लिए विशेष रूप से उपयुक्त माना जाता है।
भीष्म अष्टमी पर व्रत रखने और पितृ तर्पण करने से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बढ़ती है। श्राद्ध कर्म में पितरों को भोजन और जल अर्पित किया जाता है। इसके साथ ही ब्राह्मणों को दान देने से भी पितृ प्रसन्न होते हैं। धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि इस दिन किए गए कर्म का लाभ सामान्य श्राद्ध की तुलना में अधिक होता है।
विशेष रूप से इस दिन पितृ निवारण स्तोत्र और पितृ कवच का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। इनका पाठ करने से पितृ दोष और अन्य बाधाओं से मुक्ति मिलती है। घर में परिवारजन मिलकर तर्पण और हवन करना भी धार्मिक दृष्टि से उत्तम माना गया है।
भीष्म अष्टमी को लेकर कुछ क्षेत्रों में मंदिरों में विशेष पूजा और भजन-कीर्तन का आयोजन भी किया जाता है। भक्तजन पवित्र जल और पुष्प अर्पित कर पितरों की तृप्ति और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इसे धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण दिन माना जाता है।
इस दिन का महत्व सिर्फ धार्मिक ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी है। परिवार के बुजुर्ग अपने अनुभव साझा करते हुए younger generation को धर्म, पितृ पूजा और परंपराओं की जानकारी देते हैं। यह दिन संस्कार और पारिवारिक बंधन को मजबूत करने का अवसर भी प्रदान करता है।

भीष्म अष्टमी 2026: सोमवार, 26 जनवरी

माघ माह की शुक्ल पक्ष की अष्टमी

पितृ पूजा और तर्पण का विशेष महत्व

पितृ निवारण स्तोत्र और पितृ कवच का पाठ लाभकारी

पारिवारिक व धार्मिक परंपराओं का पालन आवश्यक

अतः 26 जनवरी 2026 को आने वाली भीष्म अष्टमी न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह परिवार और पूर्वजों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का भी अवसर है। इस दिन विशेष पूजा, तर्पण और स्तोत्र-पाठ से पितृ प्रसन्न होते हैं और जीवन में खुशहाली आती है।
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