Bhadra Purnima Vrat 2025: पूर्णिमा पर ग्रहण, क्या रखा जा सकता है पूर्णिमा व्रत, जानें धर्म शास्त्रों की राय

Update: 2025-09-07 02:43 GMT
Bhadra Purnima Vrat 2025 भाद्रपद मास की पूर्णिमा इस बार बेहद खास है क्योंकि इस दिन न केवल पूर्णिमा व्रत रखा जा रहा है, बल्कि इसी दिन चंद्र ग्रहण भी लग रहा है। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या व्रत रखा जा सकता है या ग्रहण के कारण नियम बदल जाते हैं। आइए जानते हैं इस बारे में धर्मग्रंथ क्या कहते हैं।
पूर्णिमा का व्रत हर माह रखा जाता है। इसे भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। इस व्रत में स्नान, उपवास और दान करने से व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
चंद्र ग्रहण का संयोग:
इस बार पूर्णिमा के दिन रात 9:57 बजे से दोपहर 1:26 बजे तक चंद्र ग्रहण रहेगा। इसका सूतक दोपहर 12:57 बजे से शुरू हो जाएगा। सूतक में पूजा-पाठ और श्राद्ध कर्म वर्जित माने गए हैं।
क्या व्रत रखना उचित है?
धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण के दौरान व्रत रखना वर्जित नहीं है, बल्कि यह समय तप और ध्यान के लिए अधिक फलदायी माना जाता है। हाँ, ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ नहीं किया जाता, मूर्तियों को ढक दिया जाता है और मंत्र जाप, ध्यान और मौन साधना की सलाह दी जाती है।
ग्रहण समाप्त होने पर व्रती को शुद्ध स्नान करना चाहिए। इसके बाद पुनः भगवान की पूजा और दान करना सर्वोत्तम माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि पूर्णिमा व्रत और ग्रहण का यह संगम आध्यात्मिक शुद्धि और कर्मफल निवारण के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है।
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