Basant Panchami 2026: जानिए क्यों मनाई जाती है बसंत पंचमी इसका इतिहास

Update: 2026-01-15 06:36 GMT
Basant Panchami 2026: बसंत पंचमी का त्योहार विद्या की देवी मां सरस्वती को समर्पित है इसलिए इसे सरस्वती जंयती या सरस्वती पूजा के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं अनुसार इस दिन ही मां सरस्वती का जन्म हुआ था इसलिए ही बसंत पंचमी से विद्या का आरंभ करना बेहद शुभ माना जाता है। इतना ही नहीं ये दिन साल में आने वाले सबसे शुभ दिनों में से भी एक होता है जिस कारण इस शुभ अवसर पर नया काम बिना मुहूर्त देखें शुरू किया जा सकता है। चलिए आपको बताते हैं बसंत पंचमी का इतिहास।
बसंत पंचमी क्यों मनाई जाती है?
बसंत पंचमी पर हुआ था मां सरस्वती का जन्म - पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान ब्रह्मा ने जब संसार की रचना की तो उन्हें अपनी रचना में कमी महसूस हुई। तब संसार की नीरसता को दूर करने के लिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का जिससे एक सुंदर और अद्भुत देवी प्रकट हुईं। देवी के चार हाथ थे जिनमें से एक हाथ में वीणा, एक में पुस्तक, एक में माला थी और उनका एक हाथ वर मुद्रा में था। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुर नाद किया वैसे ही संसार के समस्त जीवों में जान आ गई और प्रकृति में संगीत भर गया। चूंकि ये घटना बसंत पंचमी के दिन हुई थी इसलिए ही इस दिन को विद्या की देवी मां सरस्वती के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।
ऋतुराज बसंत के स्वागत का दिन - बसंत पंचमी को 'ऋतुराज बसंत' के आगमन का दिन भी माना जाता है क्योंकि इस दिन से कड़ाके की ठंड खत्म होने लगती है। पेड़ों पर नए-नए पत्ते आने लगते हैं और खेतों में सरसों के पीले फूल लहलाने लगते हैं। इस दौरान धरती पर पीला रंग खूब दिखाई देता है। इसी कारण बसंत पंचमी पर पीले रंग के वस्त्र पहनना बेहद शुभ माना जाता है।
कामदेव और रति की पूजा - कुछ क्षेत्रों में बसंच पंचमी के दिन प्रेम के देवता कामदेव और उनकी पत्नी रति की पूजा होती है। यही कारण है कि बसंत को प्रेम की ऋतु भी माना जाता है।
बसंत पंचमी पर होता है अबूझ मुहूर्त - बसंत पंचमी पर अबूझ मुहूर्त होता है जिस कारण इस दिन किसी भी तरह के शुभ कार्य बिना मुहूर्त के संपन्न किये जा सकते हैं क्योंकि इस दिन ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति अनुकूल होती है।
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