Akshay Tritiya: इन उपायों से दूर होगी हर समस्या, मां लक्ष्मी स्वयं आएंगी आपके पास
Akshay Tritiya: अक्षय तृतीया को युगादि तिथि कहा गया है क्योंकि त्रेता युग का आरंभ इसी तिथि से माना गया है और भगवान परशुराम जी का जन्मदिन होने के कारण परशुराम तिथि भी कहलाती है। ज्योतिषीय दृष्टि से चार अबूझ व स्वयंसिद्ध मुहूर्त है, जिसमें किया गया कोई भी कार्य चिरस्थायी एवं शुभ माना जाता है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, अक्षय तृतीया, दशहरा तथा दीवाली। अक्षय का अर्थ है जिसका क्षय न हो और सदा स्थायी रहे। इसे सौभाग्य सिद्धि दिवस भी कहा जाता है। इस दिन किए गए उपाय कर देते हैं हर संकट का अंत-
इस दिन 11 कौड़ियों को लाल कपड़े में बांधकर पूजा स्थान में रखें। इसमें देवी लक्ष्मी को आकर्षित करने की क्षमता होती है। इसका प्रयोग तंत्र-मंत्र में भी होता है। इसका कारण यह है कि देवी लक्ष्मी के समान ही कौड़ियां समुद्र से उत्पन्न हुई हैं। नियमित केसर और हल्दी से इन कौड़ियों की पूजा देवी लक्ष्मी के साथ करने से आर्थिक परेशानियों से मुक्ति मिलती है।
एकाक्षी नारियल, जिसकी एक आंख होती है, को लक्ष्मी स्वरूप माना जाता है। अक्षय तृतीया के दिन घर में पूजा स्थान में इसे स्थापित करने से देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।
शिवालय अथवा शिव मंदिर में मिट्टी का पात्र दान करने से कुंवारों को मनभावन जीवनसाथी मिलता है और विवाह में आ रही सभी परेशानियां समाप्त होती हैं।