Ahoi Ashtami 2025: सभी को मातृभक्ति और संतान कल्याण की शुभकामनाएँ

Update: 2025-10-12 15:20 GMT
Religion Spirituality ,धर्म अध्यात्म :  कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर यह त्यौहार हर वर्ष मातृत्व और संतान कल्याण की भावना को जागृत करता है। इस वर्ष अहोई अष्टमी 13 अक्टूबर को मनाई जाएगी, जिसमें भारतीय माताएँ निश्चल प्रेम और श्रद्धा से संतान की लंबी आयु, सुख एवं समृद्धि की कामना करेंगी। अहोई माता की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और व्रत की कथा इस दिन की महत्वपूर्ण विशेषताएँ हैं। इस अवसर पर परिवार, विशेषकर माता-पिता, अपने बच्चों पर अहोई माता का आशीर्वाद बनी रहे, ऐसी मंगलकामनाएँ सोशल मीडिया एवं पारिवारिक संदेशों में व्यक्त की जाती हैं।
तिथि, शुभ मुहूर्त और समय
इस वर्ष अहोई अष्टमी 13 अक्टूबर 2025, सोमवार को मनाई जाएगी।
अष्टमी तिथि 13 अक्टूबर दोपहर 12:24 बजे से प्रारंभ होगी और 14 अक्टूबर सुबह 11:09 बजे तक रहेगी।
पूजा एवं व्रत खोलने का श्रेष्ठ समय (मुहूर्त) शाम 5:53 बजे से 7:08 बजे तक निर्धारित किया गया है।
तारों को अर्घ्य देने का समय शाम लगभग 6:17 बजे के करीब माना जाता है।
व्रत, पूजा और अनुष्ठान
अहोई अष्टमी के दिन माताएँ निर्जला व्रत रखती हैं — सुबह से शाम तक न भोजन, न जल ग्रहण करती हैं, और रात में तारों को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलती हैं।
पूजा विधि में निम्न अनुष्ठान शामिल होते हैं: व्रत संकल्प करना और माता अहोई की तस्वीर या चित्र को स्थापित करना।
कलश स्थापना, जल, फूल, गंगाजल, गुड़‑चावल, गाय का दूध, अक्षत, रोली आदि पूजा सामग्री अर्पित करना।
अहोई अष्टमी की कथा का पाठ करना — इस कथा में विशेष कर एक बहू और स्याहू माता की कहानी होती है, जिसमें माता की कृपा से संतान प्राप्ति व रक्षा का महत्व बताया गया है। व्रत का पारण करते समय तारे देखकर अर्घ्य देना और बच्चे या माँ के हाथ से जल ग्रहण करना। पूजा के दौरान महिलाएँ पारंपरिक परिधान पहनती हैं, सिंदूर, चूड़ियाँ, बिंदियाँ आदि लगाती हैं और हृदय से अपनी संतान के कल्याण की कामना करती हैं।
 महत्व, आशीर्वाद एवं सामाजिक संदेश
अहोई अष्टमी का मूल उद्देश्य माता की ममत्व शक्ति के माध्यम से अपनी संतान को लंबी और सुखी आयु देना है। यह व्रत विशेष रूप से उन माताओं के लिए पवित्र माना जाता है, जो संतान के जीवन और स्वास्थ्य की चिंता करती हैं। इस वर्ष इस दिन के महत्व को बढ़ाता है यह कि इसे Ravi Pushya Yog तथा Sarvartha Siddhi Yog जैसी शुभ योगों के साथ मनाया जाएगा — माना जाता है कि ये योग व्रत एवं पूजा को और अधिक फलदायक बनाते हैं।
सलाह दी जाती है कि इस दिन माता‑पिता अपनी संतान को आशीर्वाद दें और उन्हें प्रेरित करें कि वे नैतिकता, शिक्षा और सदाचार से जीवन जिएँ। इस अवसर पर समाज में आपसी सद्भाव, प्रेम और परिवारिक आत्मीयता को बढ़ावा देने के संदेश प्रसारित किए जाते हैं।
 शुभकामनाएँ एवं संदेश
अहोई अष्टमी पर आमतौर पर निम्नलिखित संदेश और कामनाएँ प्रेषित की जाती हैं:
“अहोई माता का आशीर्वाद आपके बच्चों पर सदैव बना रहे, उन्हें लंबी आयु, स्वास्थ्य और सफलता प्राप्त हो।”
“इस पावन अवसर पर आपको और आपके परिवार को अनेकों सुख, समृद्धि और खुशियाँ मिले।”
“माँ अहोई की कृपा से आपके सभी बच्चों का जीवन उज्जवल और मंगलमय हो।”
ये संदेश परिवार, मित्रों और सोशल मीडिया पर साझा किए जाते हैं ताकि हर माँ और संतान को आशीर्वाद और प्रेम की भावना पहुंच सके।
अहोई अष्टमी 2025 न केवल एक धार्मिक पर्व है, बल्कि यह मातृत्व की श्रद्धा, संतान की सुरक्षा और पारिवारिक प्रेम का प्रतीक भी है। इस दिन माता‑पिता उपवास, पूजा और आशीर्वाद से अपनों पर अहोई माता का उज्जवल आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। इस पवित्र दिन पर हम सभी को, विशेष रूप से माताओं को, अपने बच्चों के लिए शुभकामनाएँ बांटना चाहिए ताकि यह त्यौहार उन्हें आध्यात्मिक शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करे।
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