नई दिल्ली। कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध को लेकर बड़े राष्ट्रव्यापी आंदोलन की घोषणा की है। पार्टी ने अपने अगले चरण के अभियान को ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ नाम दिया है। कांग्रेस के अनुसार यह अभियान 10 अक्टूबर से शुरू होकर 26 नवंबर तक चलेगा और इसके तहत जिला तथा ब्लॉक स्तर से लेकर गांव और बूथ स्तर तक लोगों के बीच पहुंचने की रणनीति बनाई गई है।
कांग्रेस का कहना है कि अभियान के दौरान पार्टी कार्यकर्ता मतदाता सूची और एसआईआर से जुड़े मुद्दों को लेकर लोगों को जागरूक करेंगे। इसके साथ ही जिन मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट में नहीं हैं या हटाए जाने का दावा किया जा रहा है, उन्हें मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए जरूरी प्रक्रिया में सहयोग किया जाएगा।
10 अक्टूबर से शुरू होगा अभियान
कांग्रेस की घोषणा के मुताबिक ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान 10 अक्टूबर से शुरू होगा और 26 नवंबर तक चलेगा। करीब डेढ़ महीने तक चलने वाले इस अभियान को पार्टी ने जमीनी स्तर तक पहुंचाने की योजना बनाई है।
इसके तहत कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता जिला मुख्यालयों और शहरों तक सीमित रहने के बजाय ब्लॉक, गांव और मतदान केंद्र स्तर तक पहुंचेंगे। पार्टी की कोशिश मतदाता सूची से संबंधित शिकायतों और एसआईआर को लेकर अपने सवालों को सीधे आम लोगों के बीच ले जाने की होगी।
कांग्रेस इस अभियान के जरिए मताधिकार को प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बनाने की तैयारी में है। पार्टी का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में होना जरूरी है और किसी भी पात्र मतदाता को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग
कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग भी उठाई है। पार्टी चुनाव प्रक्रिया और एसआईआर से जुड़े मुद्दों को लेकर चुनाव आयोग पर लगातार सवाल उठा रही है।
कांग्रेस की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर लगाए जा रहे आरोप राजनीतिक दावे हैं। इन आरोपों और मांगों पर संबंधित संवैधानिक संस्थाओं का पक्ष भी महत्वपूर्ण है। चुनाव आयोग की ओर से समय-समय पर मतदाता सूची के पुनरीक्षण को पात्र मतदाताओं को शामिल करने और सूची को अद्यतन रखने की प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत किया जाता रहा है।
ऐसे में आने वाले दिनों में कांग्रेस के आंदोलन के साथ चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया पर भी नजर रहेगी।
SIR को बनाया आंदोलन का प्रमुख मुद्दा
कांग्रेस के अभियान के केंद्र में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR का मुद्दा रहने वाला है। पार्टी का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटे हैं।
कांग्रेस ने करीब साढ़े तेरह करोड़ मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से काटे जाने का दावा किया है। हालांकि यह संख्या कांग्रेस की ओर से किया गया दावा है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। अभियान के दौरान पार्टी ऐसे लोगों तक पहुंचने की बात कह रही है, जिनके नाम मतदाता सूची में नहीं हैं या जिनके नाम हटाए जाने की शिकायत सामने आई है।
कांग्रेस कार्यकर्ता मतदाताओं को उनके नाम की स्थिति जांचने और आवश्यक प्रक्रिया के जरिए मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए जागरूक करेंगे।
गांव-गांव और बूथ-बूथ पहुंचने की तैयारी
‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान की खास बात इसका बूथ स्तर तक विस्तार होगा। कांग्रेस ने इस आंदोलन को केवल राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर की रैलियों तक सीमित न रखकर स्थानीय स्तर पर ले जाने की रणनीति बनाई है।
जिला और ब्लॉक इकाइयों के साथ स्थानीय पदाधिकारियों और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं की भूमिका महत्वपूर्ण रहने वाली है। गांवों और मोहल्लों में मतदाताओं से संपर्क कर वोटर लिस्ट से संबंधित समस्याओं की जानकारी जुटाने पर जोर रहेगा।
इस रणनीति के जरिए कांग्रेस एक तरफ एसआईआर को लेकर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश करेगी, वहीं दूसरी ओर अपने संगठन को भी जमीनी स्तर पर सक्रिय करने का प्रयास करेगी।
वोटर लिस्ट की जांच पर रहेगा जोर
अभियान के दौरान कांग्रेस लोगों को अपने और परिवार के सदस्यों के नाम मतदाता सूची में जांचने के लिए प्रेरित करेगी। पार्टी का जोर इस बात पर रहेगा कि चुनाव से पहले मतदाता अपनी स्थिति स्पष्ट कर लें और किसी तरह की गड़बड़ी मिलने पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसे ठीक कराने के लिए आवेदन करें।
मतदाता सूची में नाम जुड़वाने, विवरण में सुधार या अन्य बदलाव के लिए चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित प्रक्रिया होती है। कांग्रेस का कहना है कि उसके कार्यकर्ता इस प्रक्रिया को लेकर भी लोगों को जानकारी देंगे।
पार्टी इसे केवल राजनीतिक आंदोलन के बजाय मतदाता जागरूकता से जोड़कर आगे बढ़ाने की तैयारी में है।
26 नवंबर तक चलेगा आंदोलन
कांग्रेस ने अभियान की अंतिम तारीख 26 नवंबर तय की है। यह तारीख संविधान दिवस के रूप में भी मनाई जाती है। ऐसे में अभियान के समापन को लोकतंत्र, संविधान और मताधिकार के संदेश से जोड़ने की कोशिश की जा सकती है।
10 अक्टूबर से 26 नवंबर तक कांग्रेस अलग-अलग स्तरों पर कार्यक्रम आयोजित कर सकती है। हालांकि किस दिन किस राज्य या जिले में कौन सा कार्यक्रम आयोजित होगा, इसकी विस्तृत जानकारी संबंधित पार्टी इकाइयों के कार्यक्रम के आधार पर स्पष्ट होगी।
राजनीतिक माहौल गरमाने के आसार
कांग्रेस के इस राष्ट्रव्यापी अभियान से मतदाता सूची और एसआईआर को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। विपक्ष की ओर से चुनाव प्रक्रिया पर उठाए जा रहे सवालों के बीच कांग्रेस अब इसे सीधे जनता के बीच ले जाने की तैयारी कर रही है।
दूसरी ओर एसआईआर और मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग का आधिकारिक पक्ष भी महत्वपूर्ण रहेगा। मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों और दस्तावेजों के आधार पर की जाती है। इसलिए कांग्रेस की ओर से किए गए दावों के साथ आधिकारिक आंकड़ों और चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया को देखना भी जरूरी होगा।
कांग्रेस ने बनाया बड़ा राजनीतिक मुद्दा
‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान के जरिए कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि वह आने वाले दिनों में मतदाता सूची और एसआईआर के मुद्दे को अपनी राजनीतिक रणनीति के केंद्र में रखने वाली है।
10 अक्टूबर से 26 नवंबर तक चलने वाले अभियान में पार्टी जिला, ब्लॉक, गांव और बूथ स्तर तक लोगों से संपर्क करेगी। कांग्रेस का दावा है कि उसका लक्ष्य मतदाता सूची से बाहर हुए पात्र लोगों को दोबारा सूची में शामिल कराने के लिए जागरूक करना और उनकी मदद करना है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग ने इस आंदोलन को और राजनीतिक बना दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि कांग्रेस का यह अभियान जमीनी स्तर पर किस तरह आगे बढ़ता है और पार्टी के आरोपों तथा मांगों पर चुनाव आयोग की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।
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