कारगिल युद्ध: बर्फीली चोटियों पर भारतीय वीरों ने लिखा था विजय का इतिहास

Update: 2026-07-26 05:55 GMT
नई दिल्ली: आज देश कारगिल विजय व इस युद्ध में शहीद हुए शूरवीरों को याद कर रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह व सेना प्रमुख ने कारगिल वॉर मेमोरियल पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की है। इसके साथ ही उन सैनिकों को भी याद किया गया जो इस युद्ध का हिस्सा थे। दरअसल कारगिल विजय दिवस केवल एक सैन्य जीत की याद नहीं है, बल्कि यह भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस, सर्वोच्च बलिदान और अटूट राष्ट्रभक्ति को नमन करने का अवसर भी है।
वर्ष 1999 में भारतीय सेनाओं ने ऑपरेशन विजय के तहत कारगिल की दुर्गम चोटियों से पाकिस्तानी घुसपैठियों और सैनिकों को खदेड़कर तिरंगे की शान को कायम रखा। यह विजय दुनिया के सबसे कठिन युद्धक्षेत्रों में हासिल की गई थी, जिसने भारतीय सेना के शौर्य को वैश्विक पहचान दिलाई। कारगिल की लड़ाई ऐसे क्षेत्र में लड़ी गई, जहां कई स्थानों पर ऊंचाई 20,000 फीट तक पहुंचती है। ऑक्सीजन की कमी, सांस लेने में कठिनाई, माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तक गिरता तापमान और बर्फ से ढकी खड़ी चोटियां इस युद्ध को असाधारण रूप से चुनौतीपूर्ण बनाती थीं।
जहां प्रकृति ने हर कदम पर बाधाएं खड़ी कर दी थीं, वहां भारतीय सैनिकों ने अपने साहस, धैर्य और अदम्य संकल्प से विजय का नया इतिहास रच दिया। आज से 27 वर्ष पहले, 1999 में शुरू हुआ ऑपरेशन विजय केवल एक सैन्य अभियान नहीं था, बल्कि अनुशासन, रणनीति और वीरता का ऐसा उदाहरण था, जिसे दुनिया की सेनाएं आज भी सम्मान और अध्ययन की दृष्टि से देखती हैं। भारतीय सेना, वायुसेना और तोपखाने के अभूतपूर्व समन्वय ने कारगिल की ऊंचाइयों पर दुश्मन के मंसूबों को पूरी तरह विफल कर दिया।
कारगिल युद्ध की कई लड़ाइयों ने भारतीय सैन्य इतिहास में अमिट छाप छोड़ी, लेकिन पॉइंट 5140 की लड़ाई सबसे निर्णायक अभियानों में गिनी जाती है। सेना के मुताबिक यही वह चोटी है, जिसे आज पूरा देश गन हिल के नाम से जानता है। ऑपरेशन विजय की को याद करते हुए भारतीय सेना ने इसी ऐतिहासिक गन हिल तक विशेष अभियान आयोजित किया था। इसके माध्यम से उन वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने 1999 में इस दुर्गम चोटी पर तिरंगा फहराकर इतिहास रचा था।
सेना के अनुसार, लगभग 17,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित पॉइंट 5140 उस समय दुश्मन का बेहद मजबूत ठिकाना था। द्रास क्षेत्र पर नजर रखने के लिए यह सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण था। यहां से दुश्मन भारतीय सेना की गतिविधियों पर निगरानी रखता था और आसपास कब्जाई गई अन्य चोटियों तक सहायता पहुंचा सकता था। इसलिए इस चोटी को मुक्त कराना केवल सामरिक आवश्यकता नहीं, बल्कि युद्ध में निर्णायक बढ़त हासिल करने की अनिवार्य शर्त थी।
पॉइंट 5140 पर विजय केवल पैदल सैनिकों की बहादुरी की कहानी नहीं थी, बल्कि भारतीय तोपखाने की सटीक मारक क्षमता का भी शानदार उदाहरण थी। जून 1999 में अंतिम हमले से पहले भारतीय सेना ने आसपास की रणनीतिक चोटियों पर कब्जा कर अपनी स्थिति मजबूत कर ली थी। 13 और 14 जून की रात 18 ग्रेनेडियर्स ने ‘हंप’ पर कब्जा किया, जबकि 13 जम्मू एवं कश्मीर राइफल्स ने ‘रॉकी नॉब’ को अपने नियंत्रण में ले लिया। इस अभियान में बोफोर्स तोपों ने सीधे फायर कर दुश्मन के बंकरों को ध्वस्त कर दिया। उनकी सटीक गोलाबारी ने दुश्मन की रक्षा व्यवस्था को गंभीर रूप से कमजोर कर दिया।
इसके बाद 19 और 20 जून 1999 की रात निर्णायक हमला शुरू हुआ। ‘शत्रुनाश’ नामक व्यापक तोपखाना योजना के तहत बोफोर्स तोपों और बहु-नाल रॉकेट प्रक्षेपक प्रणालियों ने दुश्मन के ठिकानों पर लगातार गोलाबारी की। पूर्व और पश्चिम, दोनों दिशाओं से हुए भीषण हमलों ने दुश्मन की प्रतिरोध क्षमता लगभग समाप्त कर दी। तोपखाने की इस जबरदस्त कार्रवाई के बाद भारतीय पैदल सेना ने आगे बढ़कर हमला किया और 20 जून 1999 की सुबह 13 जम्मू एवं कश्मीर राइफल्स ने पॉइंट 5140 पर कब्जा कर लिया।
इस सफलता के साथ द्रास सेक्टर में दुश्मन की एक महत्वपूर्ण रक्षा पंक्ति ध्वस्त हो गई और कारगिल युद्ध में भारत को निर्णायक बढ़त मिल गई। इसके बाद टाइगर हिल सहित अन्य रणनीतिक चोटियों को मुक्त कराने का मार्ग भी काफी हद तक प्रशस्त हो गया। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि कारगिल विजय दिवस केवल अतीत की एक गौरवगाथा नहीं, बल्कि यह उस राष्ट्रीय संकल्प का प्रतीक है जो बताता है कि भारत अपनी संप्रभुता, अखंडता और सम्मान की रक्षा के लिए हर चुनौती का पूरी शक्ति से सामना करेगा।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी कह चुके हैं कि कारगिल की विजय केवल एक तिथि नहीं, बल्कि यह भारत का स्थायी संकल्प है कि हमारी भूमि, हमारी अस्मिता और हमारे सम्मान पर उठने वाली हर नजर का जवाब पूरी शक्ति से दिया जाएगा। कारगिल युद्ध के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए हाल ही में नई दिल्ली से ‘शौर्य अभियान’ की भी शुरुआत की गई थी।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक से विशेष मोटरसाइकिल अभियान को रवाना किया, जिसका उद्देश्य कारगिल के रणबांकुरों के साहस, पराक्रम और सर्वोच्च बलिदान की गाथा को देशभर तक पहुंचाना था। यह अभियान रविवार को कारगिल पहुंच गया, जहां कारगिल विजय दिवस के अवसर पर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कारगिल विजय दिवस आज भी हर भारतीय को यह संदेश देता है कि देश की रक्षा के लिए हमारे सैनिक किसी भी कठिनाई के सामने कभी नहीं झुकते। बर्फीली चोटियों पर लड़ी गई वह लड़ाई आने वाली पीढ़ियों के लिए साहस, कर्तव्य और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा बनी रहेगी।
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