मजदूर बने देवदूत: 51-51 हजार का इनाम...पानी में कूदे और बचा लाए कई जिंदगियां, इंसानियत की बड़ी मिसाल पेश की
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बगहा: मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित बरगी डैम में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे के बीच मानवता और साहस की एक मिसाल सामने आई है. सरकारी बचाव दल के मौके पर पहुंचने से पहले ही बिहार के 10 मजदूर पानी में कूद पड़े और डूबते लोगों को बचाने में जुट गए. इनमें सात मजदूर पश्चिम चंपारण के बगहा अनुमंडल के अलग-अलग गांवों के रहने वाले हैं. इस घटना ने संकट की घड़ी में इंसानियत की मिसाल पेश की है.
हादसे के समय बरगी डैम के पास पुल निर्माण का कार्य चल रहा था, जहां ये मजदूर तैनात थे. जैसे ही क्रूज अनियंत्रित होकर डूबने लगा, वहां मौजूद मजदूरों ने बिना किसी सुरक्षा उपकरण के अपनी जान की परवाह किए बिना बचाव कार्य शुरू कर दिया.
मजदूरों ने बिना देर किए पानी में उतरकर रस्सियों की मदद से लोगों को बाहर निकालना शुरू किया. मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार हालात बेहद भयावह थे और क्रूज तेजी से पानी में समा रहा था. मजदूरों के सुपरवाइजर बृंद कुमार यादव ने बताया कि उन्होंने पहले ही क्रूज के पायलट को रुकने के लिए आवाज लगाई थी, लेकिन पायलट ने उनकी बात नहीं मानी और आगे बढ़ गया. कुछ ही देर बाद क्रूज डूब गया और अफरा-तफरी मच गई.
इसके बाद मजदूरों ने तुरंत रेस्क्यू अभियान शुरू किया और रस्सियों के सहारे पानी में उतरकर लोगों को बाहर निकालना शुरू किया. सरकारी टीम के पहुंचने से पहले ही मजदूरों ने राहत कार्य की कमान संभाल ली थी.
मजदूरों के इस साहसिक कदम ने कई लोगों की जान बचा दी और मौके पर मौजूद लोगों ने उनकी जमकर सराहना की. सरकारी रेस्क्यू टीम के पहुंचने से पहले ही इन मजदूरों ने एक दर्जन से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया. इसके साथ ही चार शवों को भी बाहर निकालकर एम्बुलेंस के जरिए अस्पताल भेजा गया.
इस साहसिक अभियान में पिपरासी प्रखंड के मंझरिया खास गांव के प्रेम कुशवाहा, श्रीपतनगर के उपेंद्र राय, बगहा के सागर गुप्ता, राजेश साहनी, राजेश यादव, अरविंद यादव और संजय साहनी शामिल रहे. इनके अलावा दरभंगा के संतोष सदाय, भवन सदाय और रामबहादुर सदाय भी इस अभियान का हिस्सा बने.
इन सभी मजदूरों ने बिना किसी प्रशिक्षण या उपकरण के जोखिम उठाकर राहत कार्य किया. मजदूरों के अदम्य साहस और मानवता के जज्बे को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने सभी को 51-51 हजार रुपये इनाम देने की घोषणा की है. इस कदम को लोगों ने सराहनीय बताया है.
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने भी इन मजदूरों की जमकर प्रशंसा की है और उन्हें सम्मानित करने की मांग की है. यह घटना न केवल एक दर्दनाक हादसे की कहानी है, बल्कि यह भी साबित करती है कि संकट की घड़ी में इंसान ही इंसान के काम आता है.