नई दिल्ली: भारत और यूएई के बीच आर्मी टू आर्मी एक महत्वपूर्ण स्टाफ वार्ता हुई है। वार्ता में दोनों देशों के बीच हो रहे रक्षा सहयोग की समीक्षा। डेजर्ट साइक्लोन सैन्य अभ्यास में दोनों देशों की साझेदारी बढ़ाने की बात हुई। साथ नई पीढ़ी के सैन्य उपकरणों का प्रदर्शन किया गया। दोनों देशों की यह यह वार्ता अबू धाबी में हुई।
अबू धाबी में भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच पांचवीं सेना-सेना स्टाफ वार्ता आयोजित की गई। वार्ता के दौरान दोनों देशों ने मौजूदा रक्षा सहयोग की समीक्षा की। सैन्य संबंधों को और मजबूत करने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। गौरतलब है कि भारत और यूएई के बीच सैन्य स्तर पर नियमित स्टाफ वार्ताएं होती हैं, जिनका उद्देश्य रक्षा सहयोग और प्रशिक्षण के नए अवसरों को आगे बढ़ाना है। इस बैठक में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के अनुभवों और बेहतर सैन्य तौर-तरीकों को साझा करने पर विशेष जोर दिया।
इसके साथ ही पेशेवर सैन्य आदान-प्रदान को बढ़ाने और भारत में आयोजित होने वाले विभिन्न सैन्य पाठ्यक्रमों तथा कार्यशालाओं में यूएई की भागीदारी बढ़ाने पर भी सहमति बनी। वार्ता में दोनों देशों ने संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण को अगले स्तर तक ले जाने पर भी सहमति जताई। इसके तहत अगले डेजर्ट साइक्लोन सैन्य अभ्यास में एक एकीकृत युद्धक दल की भागीदारी की जाएगी। भारत और यूएई के बीच यह द्विपक्षीय थलसेना अभ्यास दोनों सेनाओं को एक-दूसरे की कार्यप्रणाली समझने और संयुक्त अभियानों में तालमेल बढ़ाने का अवसर देता है।
भारत और यूएई के बीच डेजर्ट साइक्लोन का पहला संस्करण जनवरी 2024 में भारत में और दूसरा संस्करण दिसंबर 2025 में यूएई में आयोजित हुआ था। भारतीय सेना के प्रतिनिधिमंडल ने अबू धाबी स्थित तवाजुन औद्योगिक पार्क का भी दौरा किया। यहां प्रतिनिधिमंडल ने नई पीढ़ी के सैन्य उपकरणों का प्रदर्शन देखा।
तवाजुन औद्योगिक पार्क यूएई के रक्षा, विमानन और उच्च प्रौद्योगिकी विनिर्माण से जुड़े प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में शामिल है। इस यात्रा के दौरान भारतीय सेना के प्रतिनिधिमंडल ने यूएई थल सेना के उपकमांडर ब्रिगेडियर जनरल स्टाफ मोहम्मद खमीस मोहम्मद अल-हसानी से भी मुलाकात की।
इसके अलावा, प्रतिनिधिमंडल ने यूएई में भारत के राजदूत डॉ. दीपक मित्तल से भी बातचीत की। इन मुलाकातों और सैन्य वार्ताओं से भारत और यूएई के बीच संस्थागत रक्षा संबंधों को और मजबूती मिली। दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक रक्षा साझेदारी के तहत सैन्य प्रशिक्षण, पेशेवर आदान-प्रदान, संयुक्त अभ्यास और रक्षा उद्योग के क्षेत्र में सहयोग लगातार आगे बढ़ रहा है।
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