महिला कारोबारी गिरफ्तार, फर्जी कंपनी का खुलासा

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Update: 2026-07-17 01:57 GMT

यूपी। देश के कई राज्यों में साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल किए जा रहे म्यूल बैंक खाते के मामले में गोरखपुर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सहजनवा क्षेत्र की रहने वाली मनीषा प्रजापति को गिरफ्तार कर लिया। जांच में सामने आया कि फर्जी नंदिनी माइक्रोफाइनेंस फाउंडेशन के नाम से खोले गए खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम मंगाने और उसे ठिकाने लगाने में किया जा रहा था। पुलिस अब उसके पति एवं कंपनी के दूसरे निदेशक श्याम कुमार प्रजापति की तलाश कर रही है।

सहजनवा थाने में साइबर सेल प्रभारी उप निरीक्षक वैभव मिश्रा ने केस दर्ज कराया है। उनके मुताबिक, साइबर सेल की जांच में इंडसइंड बैंक, गोलघर शाखा में संचालित खाते से देशभर की 21 साइबर ठगी की शिकायतें जुड़ी मिलीं। जांच के अनुसार, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, गुजरात, दिल्ली, गोवा, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के लोगों से ट्रेडिंग, ऑनलाइन निवेश और हाई रिटर्न का झांसा देकर करोड़ों रुपये इसी खाते में जमा कराए गए। पुलिस के अनुसार फर्म के पंजीकृत पते पर कोई माइक्रो फाइनेंस कंपनी संचालित नहीं मिली।

जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी के निदेशक श्याम कुमार प्रजापति और मनीषा के खिलाफ पहले से भी धोखाधड़ी से जुड़े मुकदमे दर्ज हैं। वहीं हरियाणा, नोएडा, पुणे और बेंगलुरु की साइबर क्राइम थानों में भी इस खाते से संबंधित मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस का कहना है कि गिरोह ने फर्जी कंपनी बनाकर साइबर अपराधियों के लिए म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराया और करोड़ों रुपये का लेनदेन कराया। गिरफ्तार मनीषा से पूछताछ की जा रही है, जबकि फरार श्याम कुमार की तलाश जारी है।

पुलिस जांच में पता चला कि नंदिनी माइक्रोफाइनेंस फाउंडेशन के नाम से सहजनवा के पाली गांव के पते पर कंपनी पंजीकृत कराई गई थी। हालांकि, जांच में मौके पर कोई माइक्रो फाइनेंस कंपनी संचालित नहीं मिली। कंपनी के निदेशक श्याम कुमार प्रजापति और उनकी पत्नी मनीषा बताए गए हैं। पुलिस का आरोप है कि फर्जी कंपनी के माध्यम से बैंक खाता खुलवाकर साइबर ठगी की रकम मंगाई जाती थी।साइबर जांच में इंडसइंड बैंक के एक खाते से एनसीआरपी पर दर्ज 21 शिकायतें जुड़ी मिलीं। पीड़ितों से ट्रेडिंग, ऑनलाइन निवेश और अधिक मुनाफे का झांसा देकर लाखों से करोड़ों रुपये इस खाते में जमा कराए गए। शिकायतें महाराष्ट्र, कर्नाटक, हरियाणा, तमिलनाडु, गुजरात, आंध्र प्रदेश, दिल्ली, गोवा, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों से दर्ज हैं। पुलिस के अनुसार, खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम प्राप्त करने और उसे आगे विभिन्न माध्यमों से निकालकर ठिकाने लगाने के लिए किया जाता था।


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